काला धन वापस लाने के चुनावी वादे पर घिरी मोदी सरकार ने संसद को पहली बार बताया है कि ढाई सौ लोगों ने विदेशी बैंकों में अपने खाते होने की बात कबूल की है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को राज्यसभा में काले धन पर हुई गरमागरम बहस का जवाब देते हुए यह भी कहा कि सरकार जांच के बाद विदेशी बैंकों में पैसा रखने वाले 427 लोगों की पहचान कर उन्हें नोटिस भी भेज चुकी है।
हालांकि जेटली ने खाताधारकों के नाम सार्वजनिक नहीं कर सकने की मजबूरी बताते हुए कहा कि जांच के इस स्तर पर नाम सार्वजनिक करने से संबंधित देश या बैंक आगे सबूत देने से इनकार कर देगा। उन सबूतों के अभाव में सभी काला धन रखने वाले बच निकलेंगे।
जेटली के मुताबिक सरकार सौ दिन के भीतर भले ही काला धन वापस नहीं ला सकी है, लेकिन इतना काम कर लिया है कि आने वाले दिनों में इसके ठोस नतीजे निकलेंगे।
जेटली ने विपक्ष को बताई सरकार की मजबूरी
वित्त मंत्री अरूण जेटली ने असंतुष्ट विपक्ष को हालात की गंभीरता का अहसास दिलाते हुए कहा कि स्विट्जरलैंड और जर्मनी सहित कई देशों से मिली जानकारी सिर्फ सुप्रीम कोर्ट को देने की शर्त पर मिली है।
हालांकि वित्त मंत्री ने यह साफ किया कि अगर काले धन पर किसी शख्स के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा चलता है तो ये नाम अपने आप बाहर आ जाएंगे। इस पर सूचना देने वाले देशों को कोई आपत्ति नहीं होगी।
वित्त मंत्री ने काले धन की जांच को सीखने की प्रक्रिया बताते हुए कहा कि सरकार इन खाताधारकों के नाम के साथ इस मामले की जटिलता के बारे में सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है।
दोनों सदनों में विपक्ष का तीखा हमला झेलने के बाद जेटली ने सफाई दी कि भारत का 92 देशों के साथ दोहरे कराधान से बचाव संबंधी संधि है। इनमें से रोमानिया को छोड़ 91 देशों ने गोपनीयता की शर्त लगा रखी है। अगर उनके द्वारा दिए गए नामों को सार्वजनिक किया जाता है तो वे आगे जानकारी नहीं देंगे।
विपक्ष ने पूछा, क्यों नहीं आया सौ दिनों में काला धन
विदेशी बैंकों में जमा काले धन की वापसी के मामले में बुधवार को सरकार को संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के तीखे हमलों का सामना करना पड़ा। एकजुट विपक्ष ने सरकार पर देश को गुमराह करने और चुनावी लाभ हासिल करने के बाद इस मुद्दे से पीछे हटने का आरोप लगाया।
जदयू सांसद शरद यादव ने तो सरकार को काले धन का एक पैसा भी विदेश से लाने की चुनौती दी और कहा कि ऐसा हुआ तो वह संसद की सदस्यता छोड़ देंगे। बसपा प्रमुख मायावती ने काले धन के लिए आजादी के बाद की सारी सरकारों को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने कांग्रेेस के गरीबी हटाओ की तरह काले धन वापस लाने का खोखला वादा किया। चर्चा के दौरान भाजपा ने एसआईटी गठित करने, एसआईटी-सुप्रीम कोर्ट को विदेशी बैंकों में खाता रखने वाले नामों की सूची सौंपने और जी20 सम्मेलन में इसे मुख्य मुद्दा बनाने को सरकार की उपलब्धियां बता कर अपनी पीठ ठोकी।
लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर ताबड़तोड़ हमले किए। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने काले धन के संबंध में हवाई किले बांधे। महज सौ दिनों में हर व्यक्ति के खाते में काले धन का 5 से 8 लाख रुपये पहुंचाने के वादे किए। मगर सत्ता में आते ही मोदी सरकार नाम उजागर करने के सवाल पर पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की भाषा बोलने लगी।
खड़गे ने कहा कि देश को गुमराह करने और इसका राजनीतिक इस्तेमाल करने के लिए सरकार को देश से माफी मांगनी चाहिए। सपा के मुलायम सिंह यादव ने देश में काले धन का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि छह महीने बाद भी सरकार को फूटी कौड़ी हाथ नहीं लगी।
सरकार पर लगाया देश को गुमराह करने का आरोप
राज्यसभा में भी कांग्रेस के आनंद शर्मा, सपा के रामगोपाल यादव, जदयू शरद यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला।
शर्मा ने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने के लिए भाजपा ने बाबा रामदेव, अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल का राजनीतिक इस्तेमाल किया। शरद यादव ने कहा कि सरकार काले धन के नाम पर विदेश से एक खरगोश भी नहीं ला सकती।
विपक्षी हमले के जवाब में लोकसभा में भाजपा के अनुराग ठाकुर और राज्यसभा में विजय गोयल ने कांग्रेस पर पलटवार किया। अनुराग ने कहा कि अपने कार्यकाल में एसआईटी गठित करने में आनाकानी करने वाली और दस साल तक काले धन की वापसी में अड़ंगा डालने वाली कांग्रेस को सवाल करने का हक नहीं है।
अनुराग इस दौरान टीएमसी पर भी हमलावर रहे। उन्होंने शारदा चिटफंड मुद्दा उठाया और कहा कि विदेशों में जमा काले धन पर चर्चा से पहले उन्हें इस पर चर्चा करनी चाहिए कि देश के भीतर क्या हो रहा है।