भाजपा के साथ चुनाव लड़ने और अब कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में मंत्री पद पर विराजमान अजित सिंह के राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के लिए पार्टी ने इस बार अपने दरवाजे बंद कर लिए हैं।
भाजपा ने फैसला किया है कि बार-बार पाला बदलने वाले अजित सिंह से आगामी लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की ‘दोस्ती’ नहीं होगी।
लोकसभा की चुनावी जंग के लिए कमर कस चुकी भाजपा उत्तर प्रदेश में अपने लगभग सभी बड़े दिग्गजों को मैदान में उतारने जा रही है।
प्रदेश के लिए उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया के तहत पार्टी ने अब तक 250 नेताओं के नामों की सूची तैयार कर ली है।
बड़े नेताओं के चुनाव क्षेत्रों को छोड़कर बाकी सीटों के लिए तीन-तीन नेताओं के नामों का पैनल बनाया गया है। हालांकि पार्टी नेतृत्व के पास टिकटार्थियों के लगभग 900 आवेदन आए थे।
सूत्रों के अनुसार चुनाव की तैयारी को लेकर प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह से लेकर डॉ. मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, कलराज मिश्र, मुख्तार अब्बास नकवी, विनय कटियार, उमा भारती, मेनका गांधी, वरुण गांधी, प्रदेश विधायक दल के नेता हुकुम सिंह, प्रदेश अध्यक्ष एल के वाजपेयी, पूर्व अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही समेत लगभग सभी दिग्गजों को मैदान में उतारने का फैसला किया गया।
इनके अलावा कुछ सीटों पर पार्टी से जुड़े सिने कलाकारों को भी चुनावी जंग में उतारा जा सकता है। अक्तूबर के अंतिम सप्ताह अथवा नवंबर के पहले हफ्ते से भाजपा उत्तर प्रदेश के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान करने लगेगी।
भाजपा ने पिछले अनुभव से सबक लेते हुए इस बार अजित सिंह के साथ किसी भी तरह का गठबंधन नहीं करने का फैसला किया है।
हालांकि पार्टी सूत्रों का दावा है कि अजित सिंह की ओर से भाजपा के साथ फिर से गठबंधन की कोशिश जारी है। लेकिन मुजफ्फरनगर के दंगों के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अजित सिंह के प्रति लोगों में भारी गुस्सा देख भाजपा उनसे दूरी बनाने में ही फायदा देख रही है।
भाजपा के साथ गठबंधन के चलते अजित सिंह को पिछले चुनाव में पांच सीटें मिली थीं।