पिछले साल हुए लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के जरिये पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराने वाली भाजपा के कदम तेजी से लड़खड़ाने लगे हैं। इसके पीछे नेतृत्व का अभाव, अंदरुनी कलह और तृणमूल कांग्रेस के साथ कथित नजदीकियों को ही प्रमुख वजह माना जा रहा है।
बीते लोकसभा चुनावों से पहले तक राज्य में पार्टी को राजनीति की दौड़ से बाहर माना जाता था। लेकिन लोकसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन करने के बाद उसने उसके बाद ही विधानसभा उपचुनावों में भी यह सिलसिला जारी रखा।
दो सीटों के लिए हुए उपचुनाव में उसने अकेले अपने बूते बशीरहाट दक्षिण सीट पर कब्जा कर लिया जबकि दूसरी सीट पर वह नंबर दो के स्थान पर रही। धीरे-धीरे उसे माकपा की अगुवाई वाले लेफ्ट फ्रंट की जगह राज्य की नंबर दो पार्टी समझा जाने लगा।