कांठ को सियासी अखाड़ा बनाने वाली भाजपा ने तहरीर के बाद इस मुद्दे से यू-टर्न ले लिया है। पार्टी एसएसपी के खिलाफ तहरीर रिसीव हो जाने को अपनी फतह के रूप में देख रही है। भाजपा नेताओं ने साफ किया है कि इस मुद्दे पर आगे आंदोलन का पार्टी का कोई इरादा नहीं है। अलबत्ता एसएसपी के खिलाफ एफआईआर नहीं हुई तो पार्टी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी। भाजपा के यू-टर्न के बाद पूरे एक महीने तक चला कांठ का सियासी ड्रामा खत्म हो गया है।
26 जून को कांठ के गांव अकबरपुर चैदरी में शिव मंदिर से पुलिस ने जबरन लाउडस्पीकर उतार लिया था। उसके बाद कांठ प्रकरण में भाजपा कूदी थी। 27 जून को आरएसएस के दो प्रचारकों और भाजपा नेताओं के नेतृत्व में कांठ में हरिद्वार हाईवे जाम किया गया था।
फिर भाजपा ने कांठ में महापंचायत का ऐलान किया लेकिन इसके बाद से ही पार्टी की गुटबाजी शुरू हो गई। संगठन और सांसदों के मतभेद खुलेआम सड़कों पर गूंजे। महापंचायत तो नहीं हुई लेकिन भाजपा के 60 कार्यकर्ता सलाखों में जरूर पहुंच गए। पार्टी ने भी महापंचायत को स्थानीय नेताओं का व्यक्तिगत फैसला बताते हुए महापंचायत से किनारा कर लिया।