दिल्ली में कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के एक धड़े को तोड़कर सरकार बनाने की भाजपा नेताओं की सक्रियता का पार्टी के अंदर ही विरोध हो रहा है।
भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेता और संघ नेतृत्व ऐसी कोशिशों के जरिए सरकार बनाने के पक्ष में नहीं है। उनका मानना है इससे पार्टी की छवि को धक्का लगेगा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान उसकी इस कोशिश की बदनामी होगी।
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है इस तरह सरकार बनाने की कोशिश लोगों की नजर में न सिर्फ अनैतिक होगी बल्कि इससे पार्टी नेतृत्व और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को नुकसान पहुंचेगा।
सरकार बनाने के खिलाफ केंद्रीय मंत्री हर्षवर्द्धन
इसके अलावा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन भी खुले तौर पर खरीद-फरोख्त के जरिये सरकार बनाने के खिलाफ अपना पक्ष जाहिर कर चुके हैं।
उनका कहना है दिल्ली के लोगों ने भाजपा को जनादेश नहीं दिया है और इस तरह सरकार बनाने की तुलना में पूर्ण बहुमत के लिए नए सिरे से चुनाव लड़ा जाए।
दरअसल भाजपा के कुछ नेता मंत्री पद हासिल करने के लिए दिल्ली में सरकार बनाने को तत्पर हैं। लेकिन यह काम जितना आसान लग रहा है उतना है नहीं।
'जगदीश मुखी को सीएम उम्मीदवार बनाना गलती'
इसी तरह दिल्ली के पूर्व वित्त मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश मुखी को भी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करना एक और भारी गलती है, जिससे पार्टी को बचना चाहिए था।
अगर पार्टी को दिल्ली में जीतना है तो उसे मुखी को मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करने से बचना चाहिए। वित्त मंत्री के तौर पर मुखी का ट्रैक रिकार्ड कोई बहुत अच्छा नहीं रहा है और शीला दीक्षित के दो कार्यकाल के दौरान विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने वफादार विपक्ष की ही भूमिका निभाई।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का कहना था कि मुखी को अभी और बाद में भी मुख्यमंत्री के तौर पर पेश करना भारी नुकसानदेह साबित होगा क्योंकि न तो उनके पास कोई करिश्मा है न ही सरकार का नेतृत्व करने की क्षमता। पार्टी को चुनाव जिताने की क्षमता भी उनके पास नहीं है।
सिर्फ भाजपा ही नहीं, ऐसे मुद्दों पर अक्सर उच्च नैतिक रुख रखने वाला संघ भी कांग्रेस या ‘आप’ के किसी धड़े को मिलाकर सरकार बनाने के खिलाफ है।
सरकार बनाने का यह है भाजपा का प्लान
एक वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘भाजपा इस साल दूसरे हिस्से में सुशासन और भ्रष्टाचार विरोध के सवाल पर चुनाव लड़ने की तैयारी करेगी। ऐसे में खरीद-फरोख्त के जरिये सरकार बनाने या पार्टी तोड़ने की कोशिश को भ्रष्ट तरीका माना जाएगा। इससे भाजपा और इसके नेतृत्व की बदनामी होगी। इसके बजाय पार्टी को चुनाव में उतरने की कोशिश करनी चाहिए।’
भाजपा के अंदर एक योजना यह चल रही है कि आम आदमी पार्टी या कांग्रेस के टूटे हुए विधायकों को शिरोमणि अकाली दल में शामिल करा दिया जाए और फिर वहां से इनका समर्थन ले लिया जाए। लेकिन इसकी कीमत भी चुकानी होगी।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, ‘जो लोग टूटेंगे वे मंत्री पद चाहेंगे। अगर उन्हें मंत्री बनाया जाएगा तो भाजपा के विधायकों का क्या होगा क्योंकि दिल्ली सरकार में सिर्फ सात मंत्री बनाने की ही व्यवस्था है।