डीडीसीए में भ्रष्टाचार के सवाल पर उपजे विवाद के बीच सांसद कीर्ति आजाद के भाजपा से निलंबन के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
बिहार विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त पर नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलने वाली पार्टी की बुजुर्ग सेना यानी मार्गदर्शक मंडल ने इस मामले में भी मोर्चा खोलने की जमीन तैयार कर ली है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, शांता कुमार और यशवंत सिन्हा ने बैठक कर इस मामले में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष विरोध जताने का फैसला किया है।
इस बीच पार्टी के एक अन्य वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी के कीर्ति के समर्थन में उतर आने से भी पार्टी में सियासी हलचल तेज हुई है।
उन्होंने पार्टी को कीर्ति जैसे ईमानदार नेता को न खोने की सलाह देने के साथ उनके लिए पार्टी को दिया जाने वाला जवाब तैयार करने की घोषणा की है।
आडवाणी ने ली जिम्मेदारी
इस मामले में पीएम मोदी को पत्र लिखने का जिम्मा लालकृष्ण आडवाणी को दिया गया है। जोशी के आवास पर चली करीब ढाई घंटे की बैठक में बुजुर्ग नेताओं ने निलंबन के तरीके पर सवाल खड़ा किया।
बैठक में शामिल नेताओं का मानना है कि कीर्ति के निलंबन में उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए निलंबन से पहले न तो नोटिस दिया गया और न ही पार्टी ने उनके आरोपों की जांच ही की।
इसके अलावा जिस संसदीय बोर्ड की बैठक में निलंबन का फैसला लिया गया, उसमें बोर्ड के आधे सदस्य भी उपस्थित नहीं थे। सूत्रों के मुताबिक बुजुर्ग सेना ने इस बार मीडिया के माध्यम से लड़ाई से बचने का फैसला किया है। तय किया गया है कि अब आडवाणी पीएम मोदी को पत्र लिख कर इस फैसले पर अपनी असहमति दर्ज करेंगे।
पत्र में निलंबन से पूर्व प्रक्रियाओं और नियमों की अनदेखी का भी मामला रखा जाएगा। हालांकि शांता कुमार ने आधिकारिक रूप से इसे रूटीन बैठक बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेता आपस में मिलते जुलते रहते हैं। यह सामान्य बैठक थी, जिसमें बातचीत के लिए कोई खास मुद्दा नहीं था।
पार्टी संशय की स्थिति में
गौरतलब है कि पहले इस विवाद में पार्टी संशय की स्थिति में थी। विवाद के चरम पर पहुंचने के बावजूद कई दिनों तक पार्टी की दूसरी पंक्ति के नेता जेटली के बचाव में नहीं आए। हालांकि बाद में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को तो पीएम मोदी ने मंगलवार को जेटली का बचाव किया।
पीएम मोदी के बचाव में खड़े होते ही माना जा रहा था कि अब नेतृत्व कीर्ति के खिलाफ कार्रवाई करेगा। बुधवार को नेतृत्व ने कीर्ति को पार्टी से निलंबित कर इसकी पुष्टि कर दी।
गौरतलब है कि डीडीसीए में कथित भ्रष्टाचार मामले में कीर्ति ने पार्टी नेतृत्व के मना करने के बाद भी वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा था। इसके बाद उन्हें बुधवार को पार्टी से निलंबित कर दिया गया।
सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा मैं कीर्ति की मदद करूंगा
भाजपा के वरिष्ट नेता सुब्रमण्यम स्वामी भी कीर्ति आजाद के समर्थन में उतरे आए हैं। स्वमी ने कहा कि 'भाजपा को कीर्ति आजाद जैसे ईमानदार नेता को नहीं खोना चाहिए। वह अरसे से डीडीसीए में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। मैं पार्टी को जवाब देने के लिए कीर्ति की मदद करूंगा।'
शत्रुघ्न के खिलाफ कार्रवाई पर फंसा पेंच
बुधवार को हुई संसदीय बोर्ड की बैठक में अरसे से बागी तेवर अपनाने वाले सांसद शत्रुघभन सिन्हा के खिलाफ भी कार्रवाई पर सहमति बनी थी।
हालांकि कीर्ति के निलंबन के मामले में बुजुर्ग सेना के मोर्चा खोलने के बाद उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की संभावना कम है। नेतृत्व अगर ऐसा करता है कि तो इस मुद्दे पर भी विवाद की आग भड़केगी।
यहां भी है पेंच और आपत्ति
कीर्ति के खिलाफ नेतृत्व की कार्रवाई पर पार्टी में अंदरखाने भी सवाल उठ रहे हैं। एक धड़े का कहना है कि कीर्ति ने जेटली के खिलाफ परोक्ष आरोप लगाए। इसका पार्टी या सरकार की नीति से कोई लेना देना नहीं है। फिर भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
जबकि सांसद आरके सिंह ने सीधे सीधे पार्टी नेतृत्व पर पैसे ले कर अपराधियों को टिकट देने केआरोप लगाए। शत्रुघ्न सिन्हा सीधे सीधे पार्टी नेतृत्व पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं। परोक्ष हमले पर तो नेतृत्व ने सक्रियता दिखाई मगर सीधे हमले पर अब तक चुप है।