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'जम्मू कश्मीर में गतिरोध तोड़ने को पहल करें मोदी'

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जम्मू कश्मीर में नई सरकार बनाने को लेकर जारी गतिरोध को तोडऩे के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद पहल करनी चाहिए। उन्हें सूबे में सरकार बनाने का काम रियासत की सियासी पार्टियों पर छोड़कर खुलेदिल से यह ऐलान करना चाहिए कि राज्य में जो भी सरकार बनेगी, केंद्र सरकार उसे पहले से भी ज्यादा सहायता और सहयोग देगी।
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यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में कही। आज़ाद ने कहा कि राज्य में राज्यपाल शासन के लिए केंद्र सरकार और भाजपा जिम्मेदार हैं।

भाजपा जिस तरह जम्मू कश्मीर में अपना हिंदू मुख्यमंत्री बनाने का दबाव बनाए हुए है उसकी वजह से राज्य में कोई सरकार नहीं बन पा रही है। यह पूछने पर कि क्या पीडीपी और कांग्रेस की मिलीजुली सरकार बन सकती है, गुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि कांग्रेस तो यह प्रस्ताव कर चुकी है। अब फैसला पीडीपी को लेना है।
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केन्द्र की मदद पर भ्रम फैला रही भाजपा

उन्होंने कहा कि भाजपा जिस तरह यह संदेश दे रही है कि अगर राज्य में गैर भाजपा सरकार बनी तो उसे केंद्र सरकार का सहयोग नहीं मिलेगा, इससे सूबे में राजनीतिक अनिश्चतता व्याप्त हो गई है।

सैलाब से तबाह हुई रियासत को ज्यादा केंद्रीय मदद की जरूरत है, लेकिन जो एक हजार करोड़ रुपए का राहत पैकेज प्रधानमंत्री ने घोषित किया था, वह भी पूरा नहीं दिया गया। भाजपा अपने नेतृत्व में सरकार बनाने का दबाव बनाए हुए है, जिससे सूबे की पार्टियां परेशान हैं। आज़ाद ने कहा कि जम्मू कश्मीर संवेदनशील राज्य है।

इसके प्रति केंद्र सरकार का अडिय़ल रवैया देशहित में नहीं है। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा कि 1975 में जम्मू कश्मीर में तीन चौथाई बहुमत से कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देशहित में अपने मुख्यमंत्री मीर कासिम का इस्तीफा करवाकर शेख अब्दुल्ला जो विधायक भी नहीं थे, को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई।
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पार्टी हित से ज्यादा देशहित को तवज्जो दें मोदी

साथ ही कांग्रेस के दो विधायकों का इस्तीफा करवाकर मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला और उप मुख्यमंत्री बेग को उपचुनाव में जितवाया। उन्होंने यह देशहित में किया और इसके बाद से ही शेख अब्दुल्ला मुख्यधारा की राजनीति में आए और उनकी तीन पीढिय़ों ने सूबे में नेशनल कांफ्रेस की सरकार चलाई।

आज़ाद का कहना है कि ऐसी ही दरियादिली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दिखानी चाहिए। उन्हें खुद पहल करके राज्य में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार का रास्ता साफ करना चाहिए।

क्योंकि पार्टी हित से ऊपर देशहित है। आजा़द ने कहा कि ऐसा नहीं होने पर कश्मीर की अवाम जिसने अलगाववादियों की मतदान बहिष्कार की अपील को दरकिनार करके बढ़चढ़कर मतदान में हिस्सा लिया। उसकी निराशा बढ़ेगी और अलगाववादियों का हौसला बढ़ेगा। जो देश के लिए ठीक नहीं होगा।
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