फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोदी की काशी में पुलिसवालों ने कराई बड़ी लूट

Fri, 16 Jan 2015 09:17 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बेनियाबाग में नई सड़क पर पिछले 26 दिसंबर को सराफा कारोबारी बागाराम माली से हुई एक करोड़ से अधिक की लूट का गुरुवार को पुलिस ने खुलासा किया। लूट की साजिश बागाराम के साथी कारोबारी तोलाराम ने रची थी। उसे बदमाशों के साथ मिलकर अंजाम तक पहुंचाया तीन सिपाहियों ने। क्राइम ब्रांच की टीम ने तीनों पुलिस कर्मियों, साजिश करने वाले साथी समेत वारदात में शामिल सात बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है।
विज्ञापन


गिरफ्तार तीन सिपाहियों में दो की तैनाती वाराणसी में थी जबकि एक की लखनऊ पुलिस लाइन में। उनकी निशानदेही पर लूटे गए एक करोड़ आठ लाख रुपये कीमत के सोने के बिस्किट और आभूषण बरामद कर लिए गए हैं। चार किलो सोने के इन आभूषणों के अलावा बदमाशों के कब्जे से भगवान ऋषभदेव की स्वर्णजड़ित अति प्राचीन मूर्ति, दो मोबाइल फोन, आठ हजार रुपये नगद,  इंडिगो कार, बाइक, एक सोना गलाने वाली भट्ठी भी बरामद की गई है।

यातायात पुलिस लाइन में गुरुवार को डीआईजी एसके भगत ने बताया कि 26 दिसंबर को बेनियाबाग, नई सड़क पर तीन सिपाहियों समेत सात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया था। अपने को सेल टैक्स अफसर बताते हुए इन बदमाशों ने मुंबई के कारोबारी बागाराम माली को ऑटो से उतारने के बाद उनके पास से चार किलो सोने के आभूषण और नगदी लूट ली थी। घटना के वक्त बागाराम का साथी तोलाराम भी मौजूद था।
विज्ञापन


मामले की छानबीन कर रहे एसपी क्राइम राहुल राज को गुरुवार को सूचना मिली कि सराफा कारोबारी के लुटेरे हड़हावीर बाबा मंदिर के पास घटना में प्रयुक्त इंडिगो कार और बाइक के साथ मौजूद हैं। क्राइम ब्रांच की तीन टीमें तत्काल मौके पर पहुंचीं और घेराबंदी कर सातों बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में गिरोह के सरगना सुधीर श्रीवास्तव ने बताया कि घटना की साजिश सराफा कारोबारी बागाराम के ही साथी तोलाराम ने रची थी। बागाराम और तोलाराम मूलत: राजस्थान के जालौर के रहने वाले हैं। दोनों साथ ही मुंबई में कारोबार करते थे। वहां से वाराणसी समेत अन्य जिलों में सोने-चांदी के आभूषणों की सप्लाई करते थे।

लूटे गए सोने के आभूषणों में से अधिकांश को इलेक्ट्रिक फर्नेंस से गलाकर सोने के बिस्किट बनाए गए। ये बिस्किट और बचे हुए आभूषण उसके चौबेपुर सोनबरसा स्थित घर पर रखे हुए हैं। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम सोनबरसा पहुंची और सुधीर के घर से सोने के बिस्किट और आभूषण के अलावा भगवान ऋषभदेव की स्वर्णजड़ित अति प्राचीन मूर्ति भी बरामद की।

आईपीएस के गनर ने बनाया लुटेरों का गिरोह

सोना कारोबारियों को लूटने के लिए पूर्वांचल में सक्रिय गिरोह में पुलिसवाले भी शामिल हैं। एक आईपीएस अधिकारी के गनर ने लुटेरों का गिरोह बनाया है। गिरोह के सदस्य वाणिज्य कर अधिकारी बनकर सराफा कारोबारियों को लूटते थे। सराफा कारोबारी बागाराम माली से हुई लाखों की लूट में क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़े आईपीएस अधिकारी के गनर समेत तीन सिपाहियों से हुई पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। गिरोह के सरगना सुधीर श्रीवास्तव का मामा रितेश श्रीवास्तव सिपाही है, जो लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। क्राइम ब्रांच अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह के पीछे कहीं कोई और मास्टर माइंड तो नहीं है।

सराफा कारोबारी से लूट में साजिशकर्ता और तीन सिपाहियों समेत कुल सात बदमाशों को क्राइम ब्रांच ने दबोचा है। वाणिज्य कर अधिकारी बनकर सराफा कारोबारी को लूटने वाले तीनों सिपाहियों में नरसिंह प्रताप सिंह वाराणसी में तैनात एक आईपीएस गनर था और गिरिजेश कुमार सिंह यहीं के एक सीओ का गनर था। जबकि रितेश कु़मार श्रीवास्तव लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात था। वह भी पहले किसी बड़े अफसर का गनर रह चुका है।

क्राइम ब्रांच के मुताबिक तीनों ने मिलकर गिरोह खड़ा किया। रितेश के भांजे चौबेपुर के सोनबरसा निवासी सुधीर को गिरोह की कमान दी गई। सराफा कारोबारी बागाराम के साथी तोलाराम को उन्होंने अपना मुखबिर बनाया। उसका काम सराफा कारोबारियों के बारे में सूचनाएं देना था। लूट के दौरान ये पुलिस वाले अपनी वर्दी में होने के साथ ही सरकारी असलहे लेकर मौके पर पहुंचते थे, जिससे सराफा कारोबारियों को एकबारगी शक नहीं होता था। गिरफ्तार बदमाशों ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में बताया कि मुंबई से जब भी कोई सराफा कारोबारी सोना लेकर चलता था तो उसकी सूचना गिरोह के लोगों को तोलाराम के जरिए मिलती थी। जिसके बाद लुटेरे वाणिज्य कर अधिकारी बनकर व्यापारी को ट्रेस कर लेते थे और उसे पकड़कर पूछताछ करते और सोना जब्त करने की बात कहकर माल लेकर वहां से निकल जाते थे।

चूंकि सराफा कारोबारियों के अपने माल का किसी प्रकार का कोई कागजात नहीं होता था इस वजह से वे पुलिस में शिकायत नहीं करते थे। लूट के सोने को चौबेपुर में सुधीर के यहां गलाया जाता था और गला माल तोलाराम के जरिए बेचकर लुटेरे रकम आपस में बांटते थे। लुटेरों ने बताया कि डेढ़ साल में दर्जन भर से अधिक सराफा कारोबारियों को उन्होंने इसी तरह लूटा।

डीआईजी ने दिए विभागीय कार्रवाई के आदेश

लूट में शामिल तीनों सिपाहियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दे दिए गए हैं। डीआईजी एसके भगत ने कहा कि गिरफ्तार बदमाशों को रिमांड पर लिया जाएगा। इनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश एसएसपी को दिया गया है। इन्हें बर्खास्त किया जाएगा ताकि भविष्य में कोई दूसरा पुलिसकर्मी ऐसी जुर्रत न कर सकें। पहले इस तरह हुई लूट की घटनाओं में किसी ने कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं कराई है। पीड़ित सराफा कारोबारी अगर तहरीर देंगे तो केस दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

खुलासा न होता तो खुदकुशी कर लेता
सराफा कारोबारी बागाराम माली और उनका साथी तोलाराम मूलत: राजस्थान के जालौर के रहने वाले हैं। दोनों साथ ही मुंबई में कारोबार करते थे। बागाराम माली ने बताया कि हम लोग मुंबई के कारोबारियों से गहना लेकर बनारस में बेचते हैं। वह छह साल से इस धंधे में हैं। कहा कि दोस्त तोलाराम ने ही दगा किया। अगर इस लूट का खुलासा नहीं होता तो कर्ज में डूबे होने की वजह से वह आत्महत्या कर लेता। बताया कि इस गिरोह के लोग मुंबई के कारोबारी सुरेश, जीतू, सुरेंद्र सहित दर्जन भर कारोबारियों को अपना शिकार बना चुके हैं।

एंटीक मूर्ति को लेकर खड़ा हुआ सवाल
मुंबई से पुरातात्विक महत्व की भगवान ऋषभदेव की अति प्राचीन मूर्ति बागाराम ही बनारस लेकर आया था, जिसे बदमाशों ने लूट लिया था। बागाराम के अनुसार यह मूर्ति एक जैन मंदिर के लिए मंगाई गई थी। ऐसे में अति प्राचीन मूर्तियों की तस्करी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

गिरफ्तार करने वाली टीम को 27 हजार रुपये इनाम
लूटकांड का खुलासा करने वाली क्राइम ब्रांच की टीम को आईजी ने 15 हजार और डीआईजी ने 12 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। टीम में प्रदीप सिंह चंदेल (इंस्पेक्टर), सुनील वर्मा, अतुल नारायण सिंह, श्यामसुंदर पांडेय, बृजेश सिंह, गोपालजी गुप्ता, सुबोध कुमार (सभी दरोगा), कमलेश राय,  ज्ञानेंद्र सिंह, राजेश राय, राधेश्याम कुशवाहा, रामभवन यादव, दिनेश सिंह, राज नारायण, राहुल सिंह, सुनील, सुमंत, विवेक मणि, राधेश्याम, पंकज, दिनेश, लालजी, मंटू, सत्यप्रकाश, आलोक, शशि यादव (सभी कांस्टेबल) थे।

दबोचे गए बदमाश
- सुधीर श्रीवास्तव उर्फ मोनू, सोनबरसा, चौबेपुर, सरगना
- तोलाराम जुआरजी प्रजापति थलकर, थाना सायला, जालौर राजस्थान, स्वर्ण व्यवसायी मुंबई
- गणेश भारती, कौवापुर चौबेपुर, वाराणसी, इंडिगो कार चालक
- नितेश श्रीवास्तव, सोनबरसा, चौबेपुर वाराणसी
- नरसिंह प्रताप सिंह, जमुनीपुर, अठगांवा भदोही, कांस्टेबल, वाराणसी में तैनात एक आईपीएस का गनर
- गिरिजेश कुमार सिंह, करमपुर, खानपुर गाजीपुर कांस्टेबल, वाराणसी में तैनात एक सीओ का गनर
- रितेश कु़मार श्रीवास्तव, खड़वाडीह सादियाबाद, गाजीपुर, कांस्टेबल, लखनऊ पुलिस लाइन में तैनात
विज्ञापन

सरेशाम स्टेशन पर 75 हजार छीन ले गए वर्दीधारी!

झांसी में रेलवे पूछताछ कार्यालय पर ट्रेन की पूछताछ कर रहे मुनीम को भय दिखा कर दो वर्दीधारी 75 हजार रुपये छीन ले गए। सूचना पर जीआरपी ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्वालियर के मुरार निवासी राजेश गोयल लश्कर क्षेत्र के छावनी बाजार नामदेव मंदिर पर रहने वाले रस्सी के व्यापारी दामोदर अग्रवाल के यहां मुनीम हैं। बुधवार को वह तकादा करने बीना गए थे। बीना में तकादा करने के बाद वह साबरमती एक्सप्रेस से झांसी आए। ग्वालियर जाने के लिए वह ट्रेन की जानकारी करने रेलवे स्टेशन पर स्थित पूछताछ कार्यालय पहुंचे। शाम करीब साढ़े छह बजे वह भीड़ में खड़े होकर ट्रेनों की स्थिति को देख रहे थे, तभी एक वर्दीधारी उनके पास पहुंचा।

राजेश के अनुसार वर्दीधारी ने उनको हड़काते हुए कहा कि वह चरस बेचता है। इंकार करने पर वर्दीधारी ने मुख्य द्वार के सामने बुलेट पर बैठे दूसरे वर्दीधारी को दरोगा बताते हुए उनके पास  चलने को कहा। उसने विरोध किया तो वर्दीधारी जबरन उसे दूसरे वर्दीधारी के पास सामान की जांच कराने के नाम पर ले गया। वहां दोनों ने उसकी अटैची खोलकर देखी। अटैची में कुछ नहीं मिला तो बैग की तलाशी ली।  बैग में रखी थैली में वर्दीधारियों ने नोट रखे देखे तो निकाल लिए और गाड़ी स्टार्ट कर भाग गए।

मुनीम के अनुसार बैग में 75 हजार रुपये रखे थे। इस घटना की सूचना तत्काल उसने अपने मालिक को दी। उन्होंने झांसी में रहने वाले अपने एक शुभचिंतक को मौके पर भेजा, मगर वह भी थाने में जाकर जीआरपी को सूचना देने की हिम्मत नहीं जुटा सके। रात में वह ट्रेन पकड़कर ग्वालियर चला गया। बृहस्पतिवार को रस्सी व्यापारी अपने मुनीम को लेकर झांसी आए और मामले की जानकारी जीआरपी को दी। मुनीम के अनुसार जैकेट पहनने के कारण वह पहचान नहीं सका कि दोनों जवान आरपीएफ, सिविल पुलिस या जीआरपी के थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें