लोकसभा चुनाव जल्दी होने की गहमागहमी के मद्देनजर भाजपा इस साल होने जा रहे नौ राज्यों के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुट गई है। पार्टी मान रही है कि इन राज्यों के नतीजे ही आगामी लोकसभा चुनाव की दिशा तय करेंगे।
इस साल सबसे पहले कर्नाटक, मेघालय, नगालैंड और त्रिपुरा में चुनाव हैं जबकि इसके बाद दिल्ली, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और मिजोरम में। इन नौ राज्यों में से पांच में कांग्रेस व तीन में भाजपा की सरकारें हैं। त्रिपुरा में वामदल हैं। इस तरह इन राज्यों की जीत व हार का नतीजा सीधे तौर पर कांग्रेस अथवा भाजपा से जुड़ा है।
पार्टी की केंद्रीय चुनाव प्रबंधन व कार्यक्रम अभियान समिति ने बुधवार को यहां बैठक कर इन राज्यों के लिए चुनाव की तैयारी का खाका तैयार करना शुरू कर दिया है। समिति के प्रभारी मुख्तार अब्बास नकवी के अनुसार भाजपा अभी से लोगों के पास बूथ स्तर तक जाएगी। भाजपा उत्तर पूर्वी राज्यों के लिए एनसीपी नेता पीए संगमा पर नजर लगाए है। राष्ट्रपति चुनाव में संगमा का समर्थन कर चुकी भाजपा अब उन्हें एनडीए के खेमे में लाने के प्रयास में जुट गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के अलग हो जाने से कर्नाटक में भाजपा को इस बार ज्यादा उम्मीद नहीं है। इन राज्यों के बाद दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में भाजपा की सीधी टक्कर कांग्रेस से है। पार्टी को लग रहा है कि यूपीए सरकार इन चार राज्यों के साथ ही लोकसभा के चुनाव करा सकती है। इस बात को ध्यान में रखकर भाजपा अपनी तैयारी में जुट गई है।
पार्टी का यह भी मानना है कि यदि सरकार लोकसभा के चुनाव तय समय पर ही कराती है तो नौ राज्यों के ये चुनाव लोकसभा के असली सेमीफाइनल साबित होंगे। पार्टी मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में दोबारा लौटने की पूरी आस लगाए है, जबकि राजस्थान में उसे कांग्रेस से सत्ता छीन लेने का भरोसा है। दिल्ली में केंद्र व शीला सरकार के खिलाफ लोगों के आक्रोश को देखते हुए भाजपा डेढ़ दशक बाद सत्ता में लौटने की उम्मीद पाल रही है।
भाजपा के 13 राज्यों में चुने जा सके हैं अध्यक्ष
इधर नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की तैयारी में जुटी भाजपा के मात्र 13 राज्यों के संगठन चुनाव पूरे हो पाए हैं। अगले हफ्ते तक यह संख्या 18 राज्यों तक पहुंच पाएगी। इसके बाद ही नये अध्यक्ष के चुनाव कराने का रास्ता खुल पाएगा।
भाजपा के संविधान के अनुसार राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की औपचारिकता पूरी करने के लिए कम से कम 50 फीसदी राज्यों में संगठन के चुनाव होने जरूरी हैं। अभी सिर्फ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, जम्मू-कश्मीर, त्रिपुरा, सिक्किम, पुड्डुचेरी, मणिपुर, लक्षद्वीप तथा दादर व नागर हवेली में ही संगठन के चुनाव संपन्न हो पाए हैं और अध्यक्ष चुने गये हैं।
अगले हफ्ते तक बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़ में चुनाव पूरे हो जाने की उम्मीद है। इसके बाद भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कराने की औपचारिकता पूरी कर पाएगी। इससे साफ है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव में लगभग आधे राज्यों से पुराने प्रदेश अध्यक्ष ही हिस्सा लेंगे।