केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे के विवादित बयान पर बिफरी भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह सड़क से लेकर संसद तक यह लड़ाई लड़ेगी। साथ ही उसने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी इस मामले में देश से माफी मांगने को कहा है।
शिंदे के ‘हिंदू आतंकवाद’ से जुड़े बयान के खिलाफ भाजपा ने गुरुवार को देशव्यापी आंदोलन की शुरुआत की। दिल्ली, लखनऊ, जम्मू, कोलकाता, भोपाल और मुंबई समेत देश के सभी प्रमुख शहरों में भाजपा ने तीखा प्रदर्शन किया और शिंदे के पुतले भी जलाए गए।
भाजपा के नए अध्यक्ष राजनाथ सिंह और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में साफ कहा कि पार्टी शिंदे की बर्खास्तगी से कम पर किसी भी कीमत पर नहीं मानेगी अथवा शिंदे माफी मांगें।
पिछले दिनों शिंदे द्वारा जयपुर के कांग्रेस चिंतन शिविर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा के शिविरों में ‘हिंदू आतंकियों को प्रशिक्षण’ देने की बात कहने के बाद से यह विवाद खड़ा हुआ है। राजनाथ सिंह ने कहा कि यदि भाजपा की मांग नहीं मानी गई तो संसद के बजट सत्र में यह मामला पूरे जोर से उठाया जाएगा।
इस मुद्दे पर विभिन्न दलों के तेवरों से भी भाजपा उत्साहित है। जद-यू नेता शरद यादव के बाद अब बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी शिंदे के बयान पर आपत्ति जताई है। गृहमंत्री शिंदे लोकसभा में सदन के नेता भी हैं। इसलिए उन्हें लेकर सरकार का अड़ियल रवैया बना रहा तो संसद के बजट सत्र पर हंगामे के साये मंडराते रहेंगे। भाजपा इस मुद्दे पर सरकार को घेरने के लिए अन्य दलों से भी चर्चा करने पर विचार कर रही है।
शिंदे के बयान से कांग्रेस को खुद को अलग कर देने भर से भी भाजपा संतुष्ट नहीं है। पार्टी का मानना है कि कांग्रेस ने वोट बैंक की राजनीति के चलते सुनियोजित तरीके से शिंदे से यह बयान दिलाया और अब उससे किनारा कर लिया। इसलिए भाजपा इस मुद्दे को सस्ते में छोड़ने के पक्ष में नहीं है।
राजनाथ ने जोर देकर कहा है कि शिंदे को माफी मांगनी ही होगी। शिंदे के बयान से पाकिस्तान में बैठे आतंकियों और उनके सरगना हाफिज सईद ने खुशी मनाई। एक ओर शिंदे संघ जैसे राष्ट्रभक्त संगठन और भाजपा को लेकर आपत्तिजनक बयान देते हैं, दूसरी और सईद और ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को ‘साहब’ और ‘जी’ से संबोधित करते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री तो बोलते नहीं हैं, इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष को अपना पक्ष रखना चाहिए। जबकि सुषमा ने कहा कि शिंदे को आपत्तिजनक बयान वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व और आतंकवाद एक नहीं है। उन्होंने कहा कि शिंदे की इस टिप्पणी से देश को भारी नुकसान हुआ है।
कांग्रेस टस से मस नहीं
कांग्रेस लगातार शिंदे का बचाव कर रही है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो लोग एक दलित के गृहमंत्री पद पर होने को नहीं पचा पा रहे हैं वही शिंदे के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि भाजपा अंदरूनी झगड़ों से ध्यान बंटाने के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है।
बयान पर मनमोहन-सोनिया की सहमति: बलबीर
शिंदे ने पकिस्तान को भारत पर हमलावर होने का मौका दे दिया है। उन्होंने कांग्रेस चिंतन शिविर में यह बयान दिया था जिसमें पीएम मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी भी मौजूद थे। तीनों उस बयान पर मौन हैं। जिससे साफ है कि ये उसे अपना समर्थन दे रहे हैं।
कांग्रेस को देंगे पटखनी: वैंकेया
अगले संसद सत्र में इस बयान को लेकर हम कांग्रेस को पटखनी देंगे और 2014 में हार का स्वाद चखाएंगे। अवसरवादी कांग्रेस पहले सीबीआई, गवर्नर ऑफिस और इनकम टैक्स विभाग का विपक्षी पार्टियों के खिलाफ दुरुपयोग करती थी, अब गृहमंत्रालय का भी गलत इस्तेमाल करने लगी है।
हिंदू हैं गुस्से में: मायावती
शिंदे के बयान से हिंदू उद्विग्न और गुस्से में हैं। अगर शिंदे के पास वाकई अपनी बात के पक्ष में तथ्य हैं तो उन्हें अदालत को देना चाहिए। देश की अनेक अदालतों में आतंकवाद से जुड़े मामले चल रहे हैं। बेहतर हो कि वे यह मुद्दा अदालत के हाथों में छोड़ें। हमें हर धर्म का सम्मान करना चाहिए।