भाजपा से निकाले जाने के एक दिन बाद ही वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने पार्टी पर जमकर अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने कहा कि पार्टी से उन्हें निकालना खुदकुशी करने जैसा है।
पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को भेजे अपने पत्र में 89 वर्षीय राज्यसभा सदस्य जेठमलानी ने कहा, ‘यह कोई नहीं बात नहीं है। मैं तो 2004 से ही पार्टी से बाहर हूं। 2010 में पार्टी ने मुझसे संपर्क कर इसमें शामिल होने का आग्रह किया था। उसी समय मैंने साफ कर दिया था कि कई तरह की समस्याओं का सामना कर रहे देश के बारे में पार्टी मेरे विचार जानती है। पार्टी को मुझे बदलने का कोई अधिकार नहीं है। हां मुझे इसे बदलने का हक जरूर है। मेरे निष्कासन के इस मूर्खतापूर्ण आदेश से पार्टी ने आत्महत्या कर ली है।’
जेठमलानी अक्सर भाजपा नेतृत्व की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने पार्टी के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी के खिलाफ तो एक तरह से मोर्चा ही खोल दिया था। भाजपा ने उन्हें अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।