संसद पर आतंकी हमलों के दोषी अफजल गुरू को लेकर पाकिस्तान की नेशनल एसेंबली में पारित प्रस्ताव पर भाजपा बिफर पड़ी है।
पार्टी ने पाकिस्तान से सभी राजनीतिक संबंध तोड़ने की मांग करते हुए कहा है कि इस बिगड़े पड़ोसी को सबक सिखाने की सख्त जरूरत है।
संसद के भीतर व बाहर पाकिस्तान के खिलाफ मैदान में उतरकर भाजपा ने कहा कि वह यही भाषा समझता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधिसभा की बैठक में हिस्सा ले रहे पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने जयपुर से पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा खोला।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और लोकसभा में पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा पाकिस्तान पर जमकर बरसे। भाजपा ने पाकिस्तान के प्रति लचीला रुख अपनाने पर यूपीए सरकार को भी आड़े हाथों लिया। जेटली ने कहा कि पाकिस्तान की संसद में पारित प्रस्ताव पूरी तरह से भारत के अंदरूनी मामलों में दखल है।
यह प्रस्ताव एक तरह से वहां की राजनीति का आधिकारिक बयान है, जो आतंकी हमलों का अनुमोदन करता है। उन्होंने कहा कि हैदराबाद में बम विस्फोट, सीमा पर भारतीय सैनिक का सर काटना, श्रीनगर में सीआरपीएफ के कैंप पर हमला और अब वहां की संसद से पारित प्रस्ताव बताता है कि भारत के प्रति पाकिस्तान के क्या इरादे हैं।
जेटली ने कहा कि संसद पर आतंकी हमले में पाकिस्तान का हाथ होने का शुरू से ही संदेह रहा है। अब वृहस्पतिवार का प्रस्ताव इस संदेह की पुष्टि करता है कि इस आतंकी हमले की साजिश पाकिस्तान में रची गई। जेटली ने कहा कि प्रधानमंत्री पाकिस्तान के साथ संबंध सामान्य बनाने के लिए आगे बढ़कर कदम उठाने की बात करते हैं, लेकिन अब उन्हें यह बात भूल जानी चाहिए।
राजनाथ ने तो बेहद आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा यदि पाकिस्तान आतंकियों का समर्थन करना बंद नहीं करता है तो भारत को इस्लामाबाद से अपना उच्चायुक्त तुरंत वापस बुला लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव से पाकिस्तान ने वास्तव में आतंकी समूहों के साथ अपने संबंधों पर मुहर लगा दी है।
यशवंत सिन्हा ने लोकसभा में कहा कि पाकिस्तान को करारा जवाब देने का समय आ गया है। अफजल के समर्थन में प्रस्ताव पारित कर पाक ने हर सीमा पार कर दी है। पार्टी प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि पाकिस्तान को सबक सिखाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह सरकार को तय करना है कि क्या सबक सिखाया जाए।