सख्त लोकपाल की मांग पर फिर से अनशन पर बैठे समाजसेवी अन्ना हजारे को राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने पत्र लिख कर भाजपा की तरफ से सफाई दी है।
संसद में लंबित लोकपाल विधेयक को अब तक पारित नहीं हो पाने का ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ते हुए जेटली ने कहा कि भाजपा शुरू से सख्त लोकपाल के पक्ष में है।
दरअसल, लोकपाल आंदोलन के चलते दिल्ली में एक बड़ी सियासी ताकत बन चुके अरविंद केजरीवाल की सक्रियता के मद्देनजर अब भाजपा को अन्ना हजारे से अपनी भूमिका साफ करनी पड़ी है।
पढ़ें:- मेरे मंच पर केजरीवाल को जगह नहीं: अन्ना
जेटली ने आरोप लगाया कि यूपीए सरकार लोकपाल को लेकर गंभीर नहीं है। इसका सुबूत यह है कि सरकार ने यह बिल शीतकालीन सत्र के एजेंडे में शामिल नहीं किया है। जबकि भाजपा लगातार मांग कर रही है कि सरकार को लोकपाल बिल पारित कराने के लिए लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते साल 27 दिसंबर को लोकसभा में पारित लोकपाल वास्तव में सरकारी लोकपाल है।
जेटली ने कहा कि भाजपा भी मानती है कि लोकसभा से पारित लोकपाल एक स्वतंत्र निकाय होने की बजाए सरकारी नियंत्रण वाला संस्थान होगा। जेटली ने अन्ना के 30 नवंबर के पत्र के जवाब में यह पत्र लिखा।
पढ़ें:- 'जन लोकपाल नहीं, तो यूपीए को न दें वोट'
जेटली ने कहा कि जब यह बिल राज्यसभा की सलेक्ट कमेटी के पास आया तो भाजपा ने कई महत्वपूर्ण संशोधन दिए, लेकिन सरकार ने उन सभी को हल्का कर दिया।
जेटली ने अन्ना से कहा कि वे यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं ताकि इस मामले में पैदा भ्रांतियां दूर हो सकें। उन्होंने दोहराया कि भाजपा अब भी सख्त लोकपाल के पक्ष में है।