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अभी कायम है आडवाणी का जादू, यह रहा सबूत

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भाजपा के मौजूदा शीर्ष नेतृत्व ने पार्टी के पितामह लालकृष्ण आडवाणी को भले ही राजनीति क्षितिज से पीछे धकेल दिया हो, लेकिन कैडर और लोकसभा उम्मीदवार अपनी चुनावी वैतरणी पार लगाने के लिए उनसे आशीर्वाद चाहते हैं।
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पार्टी में किनारा किए जाने के बावजूद कश्मीर से लेकर सुदूर अरुणाचल प्रदेश तक भाजपा के चुनाव प्रचार के लिए आडवाणी की रैलियों की मांग हो रही है।

पार्टी के स्टार प्रचारक नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह के बाद रैलियों के लिए आडवाणी की मांग है। रैलियों में शामिल होने के लिए आडवाणी की करीबी सुषमा स्वराज की मांग भी कम नहीं है।

मोदी की मांग सबसे ज्यादा

चुनाव प्रचार के लिए सबसे ज्यादा मांग मोदी की है। उनके बाद पार्टी अध्यक्ष होने के नाते राजनाथ सिंह की मांग है। तीसरे नंबर पर आडवाणी व सुषमा हैं। जबकि पूर्व अध्यक्ष डा. मुरली मनोहर जोशी, अरुण जेटली को रैलियों में बुलाने को लेकर उम्मीदवारों में ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा है।

अलबत्ता, पूर्व अध्यक्ष वेंकैया नायडू और नितिन गडकरी की भी कई क्षेत्रों में मांग है। भाजपा के इन स्टार प्रचारकों के अलावा रुपहले पर्दे से भाजपा में आई हेमा मालिनी, स्मृति ईरानी, विनोद खन्ना जैसे सिने स्टारों की भी मांग हो रही है।

खास बात यह है कि जम्मू और कश्मीर, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में आडवाणी की रैलियों की सबसे ज्यादा मांग है।
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तब उफान पर थी आडवाणी की लोकप्रियता

90 के दशक में भाजपा समेत संघ परिवार में आडवाणी की लोकप्रियता ऐसे ही उफान पर थी, जैसी आज मोदी की है। क्योंकि अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण को लेकर वे रथयात्रा निकाल कर देश-विदेश में चर्चा में आ चुके थे, हालांकि तब भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी भी थे, जो कुशल वक्ता थे।

लेकिन दो दशक बाद भी भाजपा कैडर में आडवाणी को सुनने की मांग बरकरार है। इस चुनाव में मोदी की 185 रैलियां होनी हैं।

‘भारत विजय’ के नाम से हो रही इन रैलियों की शुरुआत हो चुकी है। मोदी के अलावा आडवाणी, राजनाथ सिंह, सुषमा, जेटली आदि वरिष्ठ नेताओं की रैलियां होने लगी हैं।
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