प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गोधरा के बहाने हमला करने के बाद महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के रिश्ते तल्ख हो गए हैं। कयास ये भी है कि दोनों दलों का गठबंधन एक बार फिर टूट सकता है।
भाजपा की महाराष्ट्र इकाई के वरिष्ठ नेताओं की गुरुवार को मुंबई में बैठक हो रही है, जिसमें सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर होने वाले कार्यक्रमों पर चर्चा होना है। माना जा रहा है कि बैठक में शिवसेना के साथ गठबंधन का भी सवाल उठ सकता है और भाजपा गठबंधन जारी रखने के मसले पर अहम फैसला ले सकती है।
शिवसेना महाराष्ट्र की राजनीति समेत मुल्क की राजनीति में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी रही है, हालांकि पिछले विधानसभा चुनावों में सीटों पर समझौता न हो पाने के कारण दोनों दलों का गठबंधन टूट गया था। चुनाव के बाद दोनों दलों ने सरकार बनाने के लिए साझेदारी की, लेकिन बीते 12 महीने में दोनों के रिश्ते तलवार की धार पर ही रहे हैं।
पढ़िए किन-किन मौकों पर भाजपा और शिवसेना के रिश्तों में आई कड़वाहट-
संजय राउत ने दिलाई गोधरा दंगों की याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर आया शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत का बयान दोनों दलों के बीच तल्खी का ताजा कारण है। प्रधानमंत्री ने बुधवार को आनंद बाजार पात्रिका को दिए साक्षात्कार में दादरी और पाकिस्तान गजल गायक गुलाम अली के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।
प्रधानमंत्री के बयान के बाद शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि ये हमारे प्रिय नरेंद्र मोदी का बयान नहीं है, जिसे गोधरा के बाद दुनिया भर ने जाना था।
राउत ने गुजरात दंगों की ओर इशारा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को गोधरा और गुजरात के लिए ही जाना जाता है। भाजपा राउत के बयान पर चुप है, पार्टी में नाराजगी बढ़ गई है।
सुधींद्र को कालिख पोतने पर भड़के फडणवीस
भाजपा और शिवसेना के रिश्तों पर कड़वाहट का बड़ा कारण भाजपा के पितृपुरुष लाल कृष्ण आडवाणी के सहयोगी सुधींद्र कुलकर्णी के चेहरे पर कालिख पोतना बना।
सुधींद्र कुलकर्णी ने पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी की किताब का विमोचन समारोह मुंबई में आयोजित किया था। शिवसेना ने विमोचन समारोह का विरोध किया और आयोजन रद्द करने की मांग की। हालांकि सुधींद्र कुलकर्णी ने ऐसा नहीं किया, जिसके बाद विरोध में शिवसेना कार्यकर्ताओं ने उनके चेहरे पर कालिख पोत दी।
शिवसेना की कार्रवाई पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भड़क गए और उसकी कड़ी आलोचना कर डाली।
गुलाम अली के कार्यक्रम का किया विरोध
शिवसेना ने पाकिस्तान के गायक गुलाम अली का विरोध किया, जिसके चलते मुंबई में होने वाला उनका कार्यक्रम रद्द करना पड़ा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुलाम अली के कार्यक्रम को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने का वादा किया था, लेकिन आयोजक शिवसेना के दबाव में झुक गए। कार्यक्रम रद्द होने के कारण महाराष्ट्र सरकार की भी आलोचना हुई और भाजपा की भी।
पिछले महीने जैन धर्म के पर्यूषण पर्व पर महाराष्ट्र में मांस की बिक्री पर लगा प्रतिबंध भी दोनों दलों के बीच तल्खी का कारण बना। पर्यूषण पर्व पर राज्य भर में मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन शिवसेना और महाराष्ट्र निर्माण सेना ने फैसले का विरोध किया। सरकार के विरोध में उन्होंने खुलेआम मांस की बिक्री भी की।
पिछले साल रमजान के महीने में महाराष्ट्र सदन में एक मुस्लिम कर्मचारी के मुंह जबरिया रोटी डालने का मामला सामने आया था। शिवसेना के विधायक की इस कारवाई पर महाराष्ट्र सरकार की काफी आलोचना हुई थी।