तीन साल पहले एक सड़क दुर्घटना में अपने आंखें और सोचने-समझने की शक्ति खो चुके युवक को अब 40 लाख रुपए मुआवजा मिलेगा। ये मुआवजा एक मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल देगा।
साल 2011 में मोटरसाइकिल सवार 23 वर्षीय बिनेश कुमार को एक मिनी बस ने जोर की टक्कर मार दी थी।
यह टक्कर इतना भयानक थी कि बिनेश का हमेशा के लिए मानसिक संतुलन खो गया, साथ ही अपनी आंखों से भी हाथ धोना पड़ा।
ट्रिब्यूनल ने इफ्फको टोक्यो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को ये निर्देश दिया कि वो बिनेश कुमार को 39,89,648 रूपए का मुआवजा दे।
बिनेश उर्फ बिन्नी ने अपने साथ हुए इस स्थायी नुकसान के मुकदमे को अपने पिता से रजिस्टर करवाया था।
इस मामले में मैक्ट के प्रीसाइडिंग ऑफिसर अरून भारद्ववाज ने कहा, 'दुर्घटना के बाद बिनेश कोई भी काम पाने के काबिल नहीं रहे। उनकी इस क्षति का सौ प्रतिशत मुआवजा मिलना ही चाहिए।'
दुर्घटना के समय बिनेश की उम्र मात्र 23 साल थी और वे गुड़गांव स्थित एक निजी फर्म में एचआर और एडमिनिस्टेटिव हेड के रूप में कार्यरत थे।
जांच के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने कहा कि बिनेश का मिनी बस डाइवर से कोई निजी रंजिश भी नहीं थी।
इस दौरान ट्रिब्यूनल ने साफ किया कि इंस्टिट्यूट ऑफ ह्यूयूमन बिहेवियर एंड एप्लाइड साइंसेज की रिपोर्ट के मुताबिक बिनेश कभी न ठीक किए जा सकने वाली क्षति का शिकार हुए हैं।
हांलाकि मिनी बस के डाइवर और मालिक ने कहा हादसे की वजह उनकी बस नहीं थी। उन्हें जानबूझकर इस मामले में घसीटा जा रहा है।
इस मामले में मैक्ट ने कोई सबूत नहीं दे पाने के कारण मिनी बस के मालिक की दलील ठुकरा दी।