यूपी के सनसनीखेज बदायूं दुष्कर्म व हत्याकांड की जांच की दिशा और दशा यू-टर्न लेने के कगार पर है। पांच आरोपियों पर सीबीआई की तीन अहम वैज्ञानिक और तकनीकी जांच की रिपोर्ट इस जघन्य कांड की नई कहानी की ओर इशारा कर रही हैं।
सूत्रों ने इशारों में बताया कि इस मामले में थाने में तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस के अन्य अधिकारियों और कुछ स्थानीय नेताओं की ओर शक की सूई जरूर घूम रही है।
आने वाली चार रिपोर्ट और आरोपियों को दावों की तस्दीक नहीं करती तब भी जांच की दिशा वह नहीं रहेगी जिस पर एजेंसी अभी चल रही है।
CBI रिपोर्ट ने मामले को दिया नया मोड
इन मुख्य आरोपियों पर हुए पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर टेस्ट ने लगभग साफ कर दिया है कि इनकी बेगुनाही का दावा सही था। इसके अलावा फॉरेंसिक साईको असेसमेंट और फॉरेंसिक स्टेटमेंट एनालिसिस टेस्ट रिपोर्ट ने इनकी बेगुनाही के दावे को और पुख्ता कर दिया है।
मालूम हो कि मई में बदायूं में दो बहनों के साथ दुष्कर्म के बाद उनकी हत्या कर शवों को पेड़ पर टांग दिया गया था। इन रिपोर्टों के मुताबिक इन पांच आरोपियों ने शुरुआती पूछताछ में जो बातें कहीं थी वह सही थीं।
कहानी कुछ और है जो साफ नहीं हो पा रही
इस मामले में तीन भाई पप्पू यादव, उर्वेश यादव और अवधेश यादव आरोपी हैं। इनके साथ दो पुलिस कांस्टेबल छत्रपाल यादव और सर्वेश यादव भी आरोपी हैं। इनका शुरू से कहना है कि दुष्कर्म और हत्या की घटना में इनका हाथ नहीं है।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट से संकेत मिल रहे हैं कि इस कांड की कहानी कुछ और है जो साफ नहीं हो पा रही है। हालांकि सीबीआई किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले चार अन्य तकनीकी जांचों की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
कई टेस्टों की रिपोर्ट आना बाकी
सीबीआई के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि मेडिकल बोर्ड, दोनों लड़कियों के परिवार वालों पर हुए पॉलीग्राफी टेस्ट की रिपोर्ट आनी बाकी है।
इसके अलावा एजेंसी को हैदराबाद के सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायगनोसिस (सीडीएफडी) और फॉरेसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट का भी इंतजार है। अगर यह रिपोर्ट भी आरोपियों के दावों की तस्दीक करती है तो जांच की दिशा बिल्कुल बदल जाएगी।