महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के विरोध जहां सड़क से लेकर संसद तक कोहराम मचा हुआ है, वहीं यूपी के वाराणसी में एक नया ही मामला सामने आया है।
यहां पुलिस ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. कृष्णमोहन सिंह को अपनी महिला मित्र के साथ मिलकर पत्नी की पिटाई करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया।
मंगलवार को प्रोफेसर की पत्नी अपने पति के साकेतनगर, नरिया स्थित घर पहुंची और बिना तलाक दिए घर में पत्नी के रूप में महिला मित्र को रखने का विरोध किया।
इसी बात को लेकर बात बढ़कर मारपीट तक पहुंच गई। इसके बाद प्रोफेसर ने अपनी पत्नी को लात-घूंसों से पीट-पीट कर घर से बाहर निकाल दिया।
प्रोफेसर पर मारपीट और धमकी देने का केस दर्ज
सहायक प्रोफेसर की पत्नी किरण सिंह को मंगलवार को सूचना मिली कि उनके पति किसी महिला के साथ रहने लगे हैं। इसपर वह साकेत नगर, नरिया स्थित उनके आवास पर पहुंच गईं।
किरण ने बिना तलाक दिए दूसरी महिला को बतौर पत्नी रखने का विरोध किया। इसी बात पर दोनों पक्षों में कहासुनी के बाद मारपीट होने लगी। इस दौरान किरण सिंह घायल हो गईं।
उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दे दी। कुछ देर बाद मौके पर पहुंची पुलिस दोनों पक्षों को हिरासत में लेकर थाने ले आई। थाने पहुंचकर किरण सिंह की तहरीर पर पुलिस ने डॉ. कृष्णमोहन सिंह और उनकी महिला मित्र शिल्पी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सहायक प्रोफेसर को गिरफ्तार कर लिया।
एसओ विनोद कुमार यादव ने बताया कि सहायक प्रोफेसर को पत्नी को मारने-पीटने एवं धमकी देने के मामले में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। उधर, प्रोफेसर ने महिला मित्र के साथ अवैध संबंधों से इंकार किया है। उनका कहना है कि गेस्ट के तौर पर उन्होंने अपने घर में महिला मित्र को रखा था।
2011 में शुरू हुआ विवाद
मेरठ के मूल निवासी महिपाल सिंह की पुत्री किरण सिंह और कृष्णमोहन सिंह कानपुर में एक छात्र संगठन के लिए साथ काम करते थे। इसी दौरान दोनों में प्रेम हो गया और उनके परिवार वालों ने 1994 में दोनों की शादी कर दी। दोनों को एक पुत्र भी है।
इसके बाद कृष्णमोहन सिंह प्रतापगढ़ में एक कालेज में पढ़ाने लगे। वर्ष 2007 में उन्होंने काशी हिंदू विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग में बतौर सहायक प्रोफेसर ज्वाइन कर लिया।
वर्ष 2011 में कृष्णमोहन के जीवन में एक महिला ने दस्तक दी, तो पति-पत्नी के बीच विवाद शुरू हो गया। किरण सिंह का आरोप है कि 20 दिसंबर 2012 को उनके पति ने अवैध संबंधों का विरोध करने पर उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। उस दौरान भी पुलिस में केस दर्ज कराया गया था।
दोनों पक्षों में समझौते के तहत तय हुआ कि तलाक होने तक दोनों अलग-अलग रहेंगे। खर्च के तौर पर डॉ. कृष्णमोहन दस हजार रुपए प्रति माह किरण को देते थे। किरण सिंह का कहना है कि 11 जुलाई 2014 को सीजेएम प्रथम की कोर्ट ने 26 हजार रुपए माहवार गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।