हरियाणा भाजपा में जाटों को आरक्षण देने का मामला काफी पीछे चला गया है। इसकी जगह अब जाट आरक्षण के दौरान हुई भीषण हिंसा ने ले ली है। इस मुद्दे पर पार्टी, सरकार, सांसद, विधायक और मंत्रियों के जाट और गैर जाट खेमे में बंट जाने के बाद बुलाई गई कोर कमेटी की बैठक में आरक्षण की जगह आंदोलन के दौरान हुई भीषण हिंसा और आगजनी पर गंभीर चर्चा हुई। पूरी बैठक हिंसा-आगजनी के कारण पार्टी के समर्थक गैर जाट बिरादरी की नाराजगी दूर करने पर केंद्रित रही।
खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कमेटी के सदस्यों को आश्वस्त किया कि आंदोलन के दौरान उन्हीं मृतक परिवारों को मुआवजा मिलेगा जो हिंसा में शामिल नहीं थे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हिंसा में शामिल लोगों की जल्द से जल्द पहचान के साथ ही आंदोलन को हिंसा का रूप देने वाले लोगों की पहचान उजागर कर हर हाल में कार्रवाई का आश्वासन दिया।
इस दौरान कमेटी के जाट सदस्यों ने जहां सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ आवाज बुलंद करने से परहेज किया, वहीं जाट मंत्रियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले गैर जाट नेताओं ने भी इस पर चुप्पी साध ली।
अधिकारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
हरियाणा भवन में बैठक की शुरुआत में ही राज्य के प्रभारी अनिल जैन ने
आरक्षण या आरोपों-प्रत्यारोपों पर चर्चा न करने की हिदायत दी। इसके बाद
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, सुधा यादव, प्रो गणेशी लाल ने गैर
जाटों में असुरक्षा की भावना, हिंसा के कारण हुई व्यापक क्षति की बात उठाई।
इनका कहना था कि भाजपा के समर्थक रहे इस वर्ग में बेहद नाराजगी है। ऐसे
में इनकी क्षतिपूर्ति के साथ ही सरकार दंगाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर
इनमें सुरक्षा की भावना पैदा करे। इन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्षतिपूर्ति
की शुरुआत क्यों नहीं की गई। इस दौरान सीएम खट्टर ने कहा कि दोषियों की
तेजी से पहचान की जा रही है।
दंगाइयों ही नहीं बल्कि लापरवाही बरतने वाले
कई पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों की पहचान हुई है। इनके खिलाफ कार्रवाई भी
शुरू की गई है। जल्द ही हिंसा की साजिश का खुलासा कर दोषियों को हर हाल में
सजा दी जाएगी। बैठक में कमेटी के सदस्यों ने अपने अपने इलाकों के बारे में
जानकारी दी। इन्हें लोगों के बीच सामंजस्य बैठाने का सिलसिला शुरू करने का
निर्देश दिया गया।
संघ को भी दी खट्टर ने जानकारी
हरियाणा भवन में चली करीब ढाई घंटे की बैठक के बाद सीएम खट्टर झंडेवालां स्थिल दीनदयाल शोध संस्थान में संघ के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने हिंसा के अलावा सरकार की ओर से की जा रही कार्रवाई की पूरी जानकारी दी। गौरतलब है कि संघ राज्य में सामाजिक तानाबाना बिगड़ने से बेहद खफा है। वह चाहता है कि सरकार और पार्टी की ओर से सामंजस्य बैठाने की पहल हो।
गैरजाटों की नाराजगी दूर करने में जुटी भाजपा सांसद राजकुमार सैनी के खिलाफ फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं करेगी। फिलहाल राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना भी खत्म हो गई है। दरअसल नेतृत्व को डर है कि सैनी के खिलाफ तत्काल कार्रवाई से गैर जाट बिरादरी में नाराजगी और बढ़ जाएगी। इसके बदले गैरजाट नेताओं की ओर से जाट मंत्रियों के खिलाफ भी कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा।
मैराथन बैठक के बाद गैर जाट नेताओं ने तो खुल कर मीडिया के सामने अपनी बात रखी, मगर जाट मंत्रियों कैप्टन अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ ने मीडिया से दूरी बना ली। इस दौरान मंत्री रामविलास शर्मा, रमेश कौशिक, सुधा यादव सहित कई गैर जाट सदस्यों ने मीडिया से बात की।