ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन पी सांडर्स की हत्या के मामले में दर्ज प्राथमिकी में शहीद-ए-आजम भगत सिंह का नाम शामिल नहीं है। लाहौर पुलिस को इस मामले से संबंधित दस्तावेजों की खोज में यह पता चला है। 1928 में सांडर्स की हत्या की गई थी।
भगत सिंह का नाम नहीं होने के बाद इस मामले में उनके निर्दोष साबित होने की संभावना बढ़ गई है। सांडर्स की हत्या के लिए भगत सिंह को 83 साल पहले लाहौर के शादमन चौक पर फांसी दे दी गई थी। तब उनकी उम्र महज 23 साल थी।