आजाद भारत में ऐसे बहुत कम मौके आए हैं जब एक घंटे के भीतर दो कैबिनेट मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा हो।
रेल मंत्री पवन बंसल और कानून मंत्री अश्वनी कुमार को कैबिनेट से बाहर का रास्ता दिखाए जाने की कहानी बेहद दिलचस्प है।
शुक्रवार को बंसल और अश्वनी के इस्तीफे की पटकथा प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की मुलाकात में लिखी गई।
बंसल के बाद कानून मंत्री अश्चनी की भी छुट्टी
सीबीआई के नित नए खुलासों में बंसल का रेलवे घूसकांड में सीधा संबंध सामने आ रहा था। ऐसे में बंसल एक तरह से सरकार और पार्टी पर बोझ बन गए थे।
हमदर्दी काम नहीं आई
सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री की बंसल को लेकर हमदर्दी जरूर थी, मगर मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए सरकार और पार्टी के हित में सोनिया ने फैसला लिया कि दोनों मंत्रियों की छुट्टी तुरंत कर दी जाए।
बंसल के इस्तीफे से पहले छह घंटे का पॉलिटिकल ड्रामा
बताया जाता है कि सोनिया की मौजूदगी में ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बंसल को फोन कर इस्तीफा देने को कहा।
पीएम से मिलने के बाद घटनाक्रम तेज
सोनिया की शाम को पीएम से मुलाकात के बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेज हो गए। रेल मंत्री इसके बाद रेल भवन गए। उन्होंने वहां अपने इस्तीफे का मजमून तैयार किया।
बकरे का ‘टोटका’ भी नहीं बचा पाया बंसल की कुर्सी
इसके बाद वह अपने अशोक रोड निवास पर पहुंचे। वह करीब नौ बजे प्रधानमंत्री निवास पहुंचे और अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को सौंप दिया।
इस तरह बुझ गई लालबत्ती
इसके बाद अपनी सरकारी गाड़ी की लालबत्ती बुझाते हुए बाहर निकले बंसल ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री को उन्होंने इस्तीफा दे दिया है, जबकि जब वह अंदर गए तो बत्ती जली हुई थी।
प्रधानमंत्री के खासमखास कानून मंत्री अश्वनी कुमार के इस्तीफे पर इस दौरान कोई खबर नहीं आई तो कुछ देर बाद सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल प्रधानमंत्री निवास सात रेसकोर्स पहुंचे।
अश्वनी भी हुए कैबिनेट से बाहर
फिर प्रधानमंत्री से उनकी लगातार चर्चा हुई और बताया जाता है कि इसके बाद पीएम ने अश्वनी को भी कांग्रेस हाईकमान के उनके मंत्रिमंडल से बाहर करने के फैसले की जानकारी दे दी।
बाद में अश्वनी प्रधानमंत्री निवास पहुंचे और जब वे वहां से निकले तो उनकी गाड़ी की लालबत्ती भी बुझी हुई थी।
कुछ ऐसा रहा घटनाक्रमः
--दोपहर में तीन बजे करीब पवन बंसल के सरकारी आवास पर एक बकरे की पूजा किए जाने की खबर मीडिया में छाई रही।
--शाम को 5 बजे करीब सोनिया गांधी प्रधानमंत्री से मिलने उनके सात रेसकोर्स रोड आवास पर पहुंचीं।
--सोनिया की मौजूदगी में ही प्रधानमंत्री ने बंसल को फोन कर इस्तीफा देने को कहा।
--शाम को 5.20 बजे बंसल अपने आवास से रेल भवन स्थित दफ्तर पहुंचे। वे पिछले छह दिनों से दफ्तर नहीं आ रहे थे।
--करीब एक घंटे दफ्तर में रहकर बंसल ने अपने इस्तीफे का मजमून तैयार किया। वहां से निकलते वक्त उन्होंने इस्तीफे पर मीडिया के सवालों को टाल दिया। वह अपने आवास पहुंच गए।
--नौ बजे बंसल प्रधानमंत्री निवास पहुंचे और अपना इस्तीफा सौंपा। जब बंसल वहां से निकले तो उनकी गाड़ी की लालबत्ती बुझी हुई थी। खुद इस्तीफा देने की पुष्टि की।
--इस बीच कानून मंत्री के इस्तीफे पर कोई खबर नहीं आई तो सोनिया के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल प्रधानमंत्री निवास पहुंचे।
--पटेल से बातचीत के बाद पीएम ने अश्वनी को भी कांग्रेस हाईकमान के उन्हें कैबिनेट से बाहर करने के फैसले की जानकारी दी।
--अश्वनी प्रधानमंत्री से मिलने पहुंचे और जब वह सात रेसकोर्स से निकले तो उनकी गाड़ी की लालबत्ती भी बंद थी।
मामला
पवन बंसल के भांजे विजय सिंगला को 3 मई को रेलवे में प्रमोशन के लिए घूसखोरी के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
सिंगला ने रेलवे बोर्ड के सदस्य महेश कुमार को मेंबर इलेक्ट्रिकल बनवाने का यकीन दिलाया था। मामले में अब तक दस लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। मामले में बंसल के शामिल होने के भी सीबीआई को पुख्ता संकेत मिल रहे हैं।
अश्वनी कुमार पर कोयला घोटाला मामले में सीबीआई की जांच स्टेटस रिपोर्ट बदलवाने का आरोप है। सीबीआई की जांच में दखल को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से इस मामले में कड़ी टिप्पणियां किए जाने के बाद से अश्वनी कुमार पर इस्तीफा देने का जबरदस्त दबाव था।
सीबीआई ने हलफनामे में कहा था कि रिपोर्ट में कानून मंत्री, पीएमओ और कोयला मंत्रालय के अधिकारियों ने बदलाव कराए।