मोदी सरकार राष्ट्रीयकृत बैंकों में सरकारी हिस्सेदारी कम करके उनका प्रबंधन निजी क्षेत्र को सौंपने की तैयारी कर रही है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है।
बैंकिंग सुधारों को लेकर यूपीए सरकार द्वारा गठित पीजे नायक कमेटी की सिफारिशों को लागू करने के केंद्र सरकार के फैसले को लेकर न सिर्फ बैंक कर्मचारियों में विरोध पनप रहा है, बल्कि कांग्रेस, जनता दल (यू) और वामदल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुट गए हैं। बैंक कर्मचारियों के संयुक्त मोर्चे ने सरकार को 16 मार्च तक का अल्टीमेटम दिया है।
जनता दल (यू) के प्रधान महासचिव केसी त्यागी ने बैंकों के निजीकरण को राष्ट्रीय हितों के खिलाफ बताया है। वाम मोर्चे के नेता अतुल अंजान का कहना है कि ऐसा करके केंद्र की भाजपा सरकार सार्वजनिक बैंकिंग प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय पूंजी के हवाले कर उसका लेहमनीकरण कर रही है।