महाराष्ट्र में 19 साल के लंबे अंतराल के बाद गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून लागू हो गया है। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी मिलने के बाद राज्य में गोहत्या पर पूर्णतया प्रतिबंध लग गया है। इसके साथ ही गोहत्या अपराध की श्रेणी में आ गया। इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अब न सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई होगी बल्कि उन्हें जेल की सजा भी काटनी पड़ेगी।
महाराष्ट्र में 1995 में पहली बार भाजपा-शिवसेना की सरकार बनने पर विधान मंडल के दोनों सदनों में गोवंश हत्या प्रतिबंध विधेयक पारित किया गया था। उसके बाद यह अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।
महाराष्ट्र में गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून की पुरजोर पैरवी करने वाले राज्य के वित्तमंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने बताया कि भाजपा-शिवसेना सरकार में पारित किए गए इस विधेयक में कुछ खामियां थी, इसलिए केंद्र सरकार ने इसमें सुधार की सिफारिश की थी।
उसके बाद शिवसेना-भाजपा की गठबंधन सरकार चली गई। कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने गोवंश हत्या प्रतिबंध कानून को लेकर अपना कोई अभिप्राय केंद्र सरकार को नहीं दिया, जिसके चलते 15 साल तक यह विधेयक लटका रहा। राज्य में देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने केंद्र को अपना अभिप्राय भेजा और राष्ट्रपति ने इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए।