योग गुरु बाबा रामदेव अपने ही गुरु को भूल गए। स्वामी रामदेव बुधवार को स्वामी आनंद स्वरूप चैतन्य उर्फ बंगाली बाबा की अंत्येष्ठी में भी शामिल नहीं हुए। अंत्येष्ठी पर शांति यज्ञ कर बंगाली बाबा को श्रद्धांजलि दी गई।
स्वामी आनंद चैतन्य का 19 दिसंबर को गंज स्थित आश्रम पर निधन हो गया था। स्वामी आनंद चैतन्य योग गुरु बाबा रामदेव के गुरु थे। उन्होंने बाबा रामदेव को योग और आयुर्वेद की शिक्षा दी थी। रामदेव को आंखों की दवाई दृष्टि के बारे में भी बताया था। दृष्टि से ही रामदेव की आंख में ज्योति लौटी थी।
बिजनौर में अपनी सभा के दौरान रामदेव ने इस बात का जिक्र किया था। रामदेव बंगाली बाबा के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे थे। 31 दिसंबर को बाबा की अंत्येष्ठी में भी शामिल नहीं हुए।
उधर, अंत्येष्ठी के अवसर पर बंगाली बाबा के आश्रम में शांति यज्ञ का आयोजन किया गया। उनके अनुयायियों ने बंगाली बाबा को श्रद्धांजलि दी और बाबा के चित्र के सम्मुख पुष्प अर्पित किए।
19 दिसंबर को हुआ था देहावसान
19 दिसंबर 2014 को बाबा रामदेव के गुरु स्वामी आनंद चैतन्य उर्फ बंगाली बाबा का देहावसान हो गया। उन्होंने 103 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। वह पिछले चार साल से लकवा से पीड़ित थे। गंज में गंगाघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। शिष्य भोगराज ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस मौके पर बड़ी तादाद में बाबा के भक्त और संत मौजूद रहे। लेकिन बाबा रामदेव नहीं आए।
योग गुरु बाबा रामदेव को बुलंदियों पर पहुंचाने वाला और कोई नहीं, बल्कि स्वामी आनंद चैतन्य महाराज उर्फ बंगाली बाबा रहे हैं। उन्होंने ही रामदेव को योग के साथ आयुर्वेद की शिक्षा भी दी थी। आंखों को रोशनी देने वाली दृष्टि दवा भी बंगाली बाबा ने ही रामदेव को बताई थी। यह खुलासा खुद बाबा रामदेव ने बिजनौर आने पर किया था। रामदेव बंगाली बाबा से मिलने उनके आश्रम भी गए थे।
योग गुरु रामदेव भी आंख में चोट लगने पर उपचार कराने गंज आए थे। पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश के आश्रम में आने पर उन्हें पता चला गंज में रहने वाले स्वामी आनंद चैतन्य महाराज पर आंखों को रोशनी देने वाली कोई दवाई है। रामदेव बंगाली बाबा की शरण में गए और उपचार कराया तो उनकी आंख ठीक हो गई थी।
रामदेव बंगाली बाबा से बेहद प्रभावित हुए और उन्हें गुरु बना बैठे। बंगाली बाबा भी रामदेव से खुश रहे। रामदेव को बंगाली बाबा ने आंखों की रोशनी देने वाली दृष्टि दवा बनाने के बारे में बताया। बंगाली बाबा के भक्तों के मुताबिक उन्होंने यह शर्त रखी कि इस दवा का कभी कोई पैसा नहीं लिया जाए।
अदरक, प्याज व शहद को मिलाकर यह दवा बनाई जाती है। इसके अलावा आयुर्वेद की कई और दवाओं के बारे में बताया तथा विधि की किताब बाबा रामदेव को दे दी। साथ ही योग की शिक्षा भी दी। रामदेव बंगाली बाबा की दी हुई शिक्षा के बल पर इस मुकाम तक पहुंच गए।
पिछले दिनों बिजनौर आने पर बाबा रामदेव ने जब मंच से यह खुलासा किया कि आंखों को रोशनी देने वाली दवा उन्हें बिजनौर के ही एक संत ने दी है। यह संत कोई और नहीं, गंज में बैठे बंगाली बाबा हैं।
रामदेव की बात सुन सब रह गए थे दंग
रामदेव की यह बात सुनकर सब दंग रह गए थे। इसके बाद रामदेव बिजनौर का कार्यक्रम पूरा करके गंज अपने गुरु से मिलने गए थे। काफी देर तक दोनों में गुप्त मंत्रणा हुई थी।
बंगाली बाबा के आश्रम के पास रहने वाले 70 वर्षीय किसान विजय के मुताबिक उन्होंने लाइलाज को सही सलामत होकर जाते देखा है। बंगाली बाबा के आश्रम में ऐसे मरीज खूब आते थे, जो चल फिर भी नहीं सकते थे। फिर वह अपने पैरों से चलकर जाते थे। रात दिन मरीजों का आश्रम में आना जाना रहता था।
आश्रम में उगा रखी थी औषधि
बंगाली बाबा ने आयुर्वेद की दवा बनाने के लिए औषधि के वृक्ष आश्रम में ही उगा रखे थे। हरे भरे आश्रम में औषधि के हर वृक्ष की बंगाली बाबा को बखूबी पहचान थी। आश्रम में जाने वाला हर कोई इन वृक्षों की जानकारी लेने को उत्सुक रहता था।
रामदेव से बाबा करते थे बेहद प्यार
बंगाली बाबा के बड़े भक्त मुरादाबाद निवासी रिटायर्ड डिप्टी डायरेक्टर 70 वर्षीय नंद किशोर त्यागी के मुताबिक बंगाली बाबा रामदेव से बेहद प्यार करते थे। बंगाली बाबा अखबार व पत्रकारों से दूरी बनाए रखते थे, पर रोज शिष्यों से यह जरूर मालूम करते थे कि उन्हें बताओ रामदेव के बारे में अखबार में कोई बुरी बात तो नहीं छपी।
बंगाली बाबा के असली रूप को कोई नहीं पहचान पाया। वे बड़े योगी व संत थे। अपने आश्रम से बाहर नहीं जाते थे। पिछले कुछ सालों से उन्होंने सब से मिलना जुलना बंद कर दिया था। अपने चुनिंदा भक्तों से ही वह मिलते थे। एक बार बंगाली बाबा के साथ वह वृंदावन गए तो वहां एक बडे़ योगी आ गए। बंगाली बाबा को देखकर उन्होंने कहा कि इतना बड़ा योगी उन्होंने कोई नहीं देखा।