समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां ने एक बार फिर चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। चुनाव प्रचार को लेकर चुनाव आयोग की ओर से लगाई गई पाबंदी के चलते आज़म खां खासे नाराज हैं।
उन्होंने और समाजवादी पार्टी के दूसरे नेताओं ने भी कई बार चुनाव आयोग से इस पाबंदी को हटाने की अपील की। लेकिन चुनाव आयोग ने उनकी नहीं सुनी।
इससे नाराज आजम खां चुनाव आयोग पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा कि आयोग खुद को राजनीति का खुदा नहीं समझे। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि आयोग उनकी विधानसभा की सदस्यता समाप्त करके दिखाए।
कारगिल शहीदों पर दिया था बयान
आजम खां ने कारगिल के मुस्लिम शहीदों को लेकर बयान दिया था। जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनके प्रचार पर पाबंदी लगा दी थी।
गुरुवार को सपा कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में आजम खां ने एक बार फिर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने कहा, "यह मेरी खता थी है और रहेगी।" साथ ही उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग किसी खुशफहमी में न रहे। कारगिल शहीदों का नाम मुसलमान के अलावा कोई ले तो वह सेक्युलर और मुसलमान बताए तो वह सांप्रदायिक है।"
उन्होंने कहा, "चुनाव आयोग खुदा की तरह बर्ताव नहीं कर सकता। आयोग को ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए जो लोकतंत्र के अनुकूल और संविधान की भावना के अनुरूप हो।"
'आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण'
सपा नेता ने आगे कहा, 'मुझे किसी व्यक्ति की दया या नरमी की जरूरत नहीं है क्योंकि लोग मेरे राजनीतिक जीवन की शुरुआत से ही मुझे सिद्धांतों और ऊंचे आदर्शों वाले व्यक्ति के रूप में जानते हैं।' सपा नेता ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने उनके साथ पक्षपातपूर्ण ढंग से बर्ताव किया क्योंकि वह एक मुस्लिम हैं।
चुनाव आयोग ने आज़म खान के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए 23 अप्रैल को एक ताजा कारण बताओ नोटिस जारी किया। इससे कुछ दिन पहले ही चुनाव आयोग ने उनके कारगिल पर दिए विवादास्पद बयान को लेकर राज्य में उनके प्रचार पर रोक लगा दी थी।
आज़म पर है चुनाव प्रचार की पाबंदी
ये कोई पहला मौका नहीं है जब आजम खान ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा हो। इससे पहले भी उन्होंने कई बार चुनाव की कार्रवाई की पक्षपात पूर्ण करार दिया था। उन्होंने अमित शाह को आयोग की ओर से दी गई राहत पर पहले भी सवाल उठाए थे।
उन्होंने पिछले महीने भी आयोग पर उससमय कई सवाल खड़े किए थे, जब उन पर उत्तर प्रदेश में प्रचार करने पर रोक लगाई गई थी। उन्होंने उस समय कहा था कि चुनाव आयोग कानून से ऊपर नहीं है।
फिलहाल उनके ताजा बयान पर चुनाव आयोग का रुख क्या होगा तो ये पता नहीं। लेकिन आजम खां के तेवर से ये तो साफ हो गया कि वो आयोग से कतई खुश नहीं हैं।