अयोध्या में चौरासी कोसी परिक्रमा को लेकर विश्व हिंदू परिषद और राज्य की समाजवादी पार्टी की सरकार के टकराव को केंद्र सरकार नूरा कुश्ती मानती है।
हालाकि खुलकर केंद्र सरकार का कोई भी शीर्ष अधिकारी इस पर टिप्पणी नहीं कर रहा है,लेकिन गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को केंद्रीय एजेंसियों से जो रिपोर्ट मिल रही है, उसके मुताबिक यह सारी कवायद लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की मिली जुली कोशिश है, जिसके पीछे संघ परिवार और समाजवादी पार्टी के रणनीतिकारों का दिमाग काम कर रहा है।
खुफिया एजेंसियों को विहिप के शीर्ष नेताओं और समाजवादी पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के बीच तीन दिन पहले टेलीफोन के जरिए बातचीत की जानकारी भी मिली है जिसमें कुछ देर बाद टेली कांफ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में गुजरात सेभाजपा के दिग्गज नेता को भी शामिल किया गया।
यह जानकारी देने वाले विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि विहिप की यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बेहद सतर्क और गंभीर हैं। वह चुनाव वर्ष में उत्तर प्रदेश में 1990 जैसा माहौल नहीं बनने देना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने आईबी से पूरे मामले पर नजर रखने और लगातार जानकारियां देने को कहा है। आकलन किया जा रहा है कि विहिप और सपा के इस टकराव का जमीन पर क्या असर हो रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी प्रधानमंत्री के संपर्क में हैं। शुक्रवार को हुई कांग्रेस कोर ग्रुप की बैठक में उत्तर प्रदेश की स्थिति पर विचार विमर्श हुआ।
सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री को खुफिया एजेंसियों ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश में लगातार गिरते अपने ग्राफ से चिंतित समाजवादी पार्टी लोकसभा चुनावों के लिए अपने मुस्लिम जनाधार को एकजुट रखने की पूरी कोशिश में है।
उधर राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ राम मंदिर का मुद्दा गरम करके भाजपा के लिए हिंदुओं को एकजुट करने की रणनीति बना चुका है।
इसीलिए भाजपा के उत्तर प्रदेश प्रभारी महासचिव अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के अपने दौरे की शुरुआत ही अयोध्या में रामलला के दर्शन और मंदिर मुद्दा गरम करके की।
भाजपा के प्रचार प्रमुख नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश में अपना प्रचार अभियान श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा से शुरु कर रहे हैं।
खुफिया सूत्रों का कहना है कि कभी अयोध्या में कार सेवकों पर गोलीबारी के बाद संघ परिवार के निशाने पर रहे मुलायम सिंह यादव के पिछले एक दशक में भाजपा, संघ और विहिप नेताओं से अच्छे रिश्ते बन गए हैं। भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह यादव को अपना बड़ा भाई मानते हैं।
विहिप नेता स्वामी चिन्मयानंद के भी मुलायम सिंह यादव से अच्छे संबंध रहे हैं। उनकी पहल पर ही अशोक सिंघल की अगुआई में विहिप नेताओं का प्रतिनिधि मंडल मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिला।