भारत सरकार ने सरबजीत के परिजनों को पाकिस्तान जाने की अनुमति दे दी है। सरबजीत के साथ परिवार का एक सदस्य अस्पताल में साथ रहेगा।
वहीं, पाकिस्तान सरकार ने परिवार के किसी एक सदस्य को सरबजीत के साथ अस्पताल में रहने की इजाजत दी है। सरबजीत के साथ भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारियों को रहने की इजाजत भी दी गई।
सरबजीत पर हमले से चिंतित उनके परिजनों आज दिल्ली आ रहे हैं।
विदेश नीति पर उठे सवाल
पाकिस्तान में सरबजीत सिंह पर हुए हमले के बाद भारत की विदेश नीति पर सवाल उठने लगे हैं।
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र को 'कमजोर' करार देते हुए कहा है कि सरबजीत समेत विदेश नीति के हर मुद्दे पर यूपीए सरकार नाकाम रही है।
उन्होंने कहा, 'सरबजीत के मुद्दे को अलग-थलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। ये केंद्र सरकार की नाकामी का एक और सबूत है। चीनी घुसपैठ, इटालियन नौसैनिकों और भारतीय सैनिकों की गर्दन काटे जाने के मुद्दे पर भारत सरकार कमजोर ही साबित हुई है।'
समाजवादी पार्टी सांसद नरेश अग्रवाल ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र संघ उठाने की मांग की है। वहीं, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरबजीत सिंह पर हमले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
शुक्रवार को हुआ हमला
गौरतलब है कि शुक्रवार को पाकिस्तान की जेल में बंद भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह पर छह कैदियों ने धारदार हथियार और ईंटों से हमला कर दिया।
हमले में सरबजीत के सिर पर गहरी चोट आई है। सरबजीत को जिन्ना अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। उसकी हालत नाजुक बनी हुई है और वह कोमा में हैं।
सरबजीत को लाहौर की कोट लखपत जेल में कैदियों ने शुक्रवार शाम को हमला किया जब उसे और अन्य कैदियों को एक घंटे के ब्रेक के लिए सेल से बाहर लाया जा रहा था।
इस दौरान कम से कम छह कैदियों ने सरबजीत के सिर, गले और पेट पर धारदार हथियार और ईंटों से हमला कर जख्मी कर दिया। हमले में सरबजीत के सिर पर गहरी चोट आई है।