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जानिए उन्हें, जिन्होंने मोदी को नहीं बनने दिया संन्यासी

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आपको शायद ही पता हो कि पिछले साल 26 मई को जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय उनके शूट की जेब में एक फूल था। ये फूल दरअसल 'प्रसाद' था, जिसे स्वामी आत्मआस्थानंद ने भेजा था।
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95 वर्षीय स्वामी आत्मआस्थानंद कोलकाता स्थित बेल्लूर मठ के मुख्य संत और और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गुरु हैं। नरेंद्र मोदी 9 मई की दो दिनों की यात्रा पर कोलकाता जा रहे हैं, जहां वे आत्मआस्थानंद से भेंट करेंगे।

नरेंद्र मोदी के जीवन में रामकृष्ण मिशन के इस संत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने ही मोदी को उनकी युवावस्था में राजनीति में आने की सलाह दी, जिसकी बदौलत देश ने उन्हें प्रधानमंत्री के रूप में देखा।
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9 मई को उनसे मुलाकात कर मोदी अपना पुराना वादा निभाएंगे। पिछली बार मोदी ने उनसे 2013 में मुलाकात की थी, उस समय वह गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
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1966 में हुई थी मोदी और आत्मआस्‍थानंद की भेंट

नरेंद्र मोदी ने अपनी पिछली मुलाकात में स्वामी आत्मआस्‍थानंद से दोबारा मिलने का वादा किया ‌था। आत्मआस्‍थानंद से मोदी की पहली मुलाकात 1966 में हुई थी। दरअसल 1966 में वे गुजरात के राजकोट शहर के रामकृष्‍ण मिशन आश्रम के प्रमुख बनाए गए थे।

विवेकानंद के जीवन और कार्य से प्रभावित नरेंद्र मोदी ने उन्हीं दिनों राजकोट स्थिति रामकृष्‍ण मिशन आश्रम में शरण ली थी।

उल्लेखनीय है कि विवेकानंद ने ही रामकृष्‍ण मिशन की स्‍थापना की थी। नरेंद्र मोदी उन दिनों युवा थे और उनका मन संन्यास की ओर झुका हुआ था। रामकृष्‍ण मिशन आने से पहले कई वर्षों तक वह घूमते रहे और अध्यात्म ज्ञान की तलाश करते रहे।

आत्मआस्‍थानंद ने मोदी को संन्यासी बनने से रोका था

राजकोट आश्रम में आत्मआस्‍थानंद की सान्निध्य में कुछ समय तक रहने के बाद, मोदी ने उनसे संन्यासी बनने की इच्छा जताई। उस समय आत्मआस्‍थानंद ने उनसे कहा कि संन्यास उनके लिए नहीं बना है।

हालांकि मोदी संन्यासी बनने का मन बना चुके थे। राजकोट आश्रम ने जब संन्यास की दीक्षा नहीं दी, तो वे बेल्लूर चले गए।

आत्मआस्‍थानंद ने उस समय के बेल्लूर मठ प्रमुख स्वामी माधवानंद को एक पत्र लिखा। मोदी वह पत्र लेकर बेल्लूर गए, हालांकि वहां भी उन्हें संन्यास की दीक्षा नहीं दी गई। वहां मोदी से कहा गया ‌कि वे लोगों के लिए काम करें, उन्हें समाज से अलग-थलग होने की आवश्यकता नहीं है।
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9 मई को फिर होगी मोदी और आत्मआस्‍थानंद की भेंट

मोदी बेलुर से लौटकर एक बार फिर आत्मआस्‍थानंद के पास आए। आत्मआस्‍थानंद ने उन्हें समाज की सेवा करने की सलाह दी, जिसके चंद दिनों बाद ही वह आरएसएस में शामिल हो गए। संघ में काम करते हुए मोदी राजनीति में आ गए।

मोदी ने जब पिछली बार आत्मआस्‍थानंद से भेंट की तो वे पूरी तरह स्वस्‍थ्य थे और दोनों ने ही लंबी बात की। मोदी उनके पैरों के पास बैठे थे और उनका आशीर्वाद भी लिया।

हालांकि इस बार शायद वैसी मुलाकात न हो, आत्मआस्‍थानंद फरवरी से बीमार हैं और अस्पताल में भर्ती हैं।
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