1000 टन सोना मिलने की आस में पिछले 15 दिन से उन्नाव के डौंडिया खेड़ा की ओर टकटकी लगाए करोड़ों लोगों की उम्मीद टूटती दिख रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने वहां पर निर्धारित स्थान पर चल रही खुदाई को बंद कर दिया है।
हालांकि विभाग का कहना है कि मौजूदा समय में खुदाई की जगह से सोना या कोई अन्य धातु जैसी चीज नहीं मिली है, लेकिन दूसरे ब्लॉक (नदी के समीप) की खुदाई में धातु जैसी चीज हो सकती है।
अब अगले दो-तीन दिनों में यह निर्णय लिया जाएगा कि दूसरे अन्य ब्लाकों में खुदाई का काम हो या नहीं। फिलहाल मौजूदा ब्लॉक जहां ग्यारह दिन से खुदाई चल रही है, उसे बंद कर दिया जाएगा। पौने पांच मीटर गहराई तक खुदाई के बाद अब यहां पथरीली जमीन आ गई है। लिहाजा एएसआई इस स्थान पर खुदाई नहीं करेगा।
एएसआई के महानिदेशक प्रवीण श्रीवास्तव ने बताया कि 11 दिन पूर्व डौंडिया खेड़ा में वाईवीआई के वृत के चतुर्थ भाग के तीसरे हिस्से में खुदाई का काम शुरू हुआ था। वहां पर अब तक लगभग 4.80 मीटर गहराई तक खुदाई हो चुकी है। अब इसके नीचे पथरीली जमीन आ गई है। इसलिए यहां पर खुदाई नहीं होगी। लेकिन इस ट्रैंच का मान चित्रण और फोटोग्राफी की जा रही है।
उन्होंने बताया की एएसआई दीवार के ढांचे को खत्म करके खुदाई का क्षेत्र बढ़ाना चाहता है। सतह संख्या नौ से प्रारंभिक ऐतिहासिक काल के नमूने मिले हैं। इसमें शीशे की चूड़ियां, लोहे की कीलें, मनके, मिट्टी का घड़ा, खिलौने और चूल्हा मिला है।
अब भी अनमोल वस्तु मिलने की संभावना
श्रीवास्तव का कहना है कि इन सभी वस्तुओं की जांच की जा रही हैं। प्रारंभिक जांच में कुछ वस्तुएं सातवीं और आठवीं शताब्दी के होने का अनुमान है। इसके अलावा एक लखौरी ईंट की दीवार भी मिली है।
ऐसा माना जा रहा है कि यदि खुदाई स्थल के अगल-बगल क्षेत्र में खुदाई की जाए तो वहां से कुछ और ऐतिहासिक पुरातत्व अवशेष मिल सकते हैं। हालांकि उन्होंने सोना मिलने से एक बार फिर इंकार किया।
उन्होंने यह माना कि जीएसआई की जांच में इस क्षेत्र में धातु जैसी चीज होने के संकेत मिले थे। हो सकता है कि दूसरे ब्लॉक की खुदाई में ऐसी कोई ऐतिहासिक पुरातत्व चीजें मिले, जो अनमोल हों। फिलहाल खुदाई का काम जारी रहेगा या नहीं, इस पर निर्णय अगले दो-तीन की खुदाई के बाद लिया जाएगा।