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'देश तय करे कैसी रेल चाहिए, वर्ल्ड क्लास या खस्ताहाल'

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बढ़े रेल किराए और माल भाड़े को लेकर चौतरफा हमलों से घिरी मोदी सरकार के बचाव में वित्त मंत्री अरुण जेटली आगे आए हैं। उन्होंने वर्ल्ड क्लास रेल के नाम पर इस फैसले को जायज ठहराने की कोशिश की है। अपने फेसबुक पेज पर जेटली ने लिखा कि रेल मंत्री ने एक कठिन लेकिन सही फैसला किया है। देश को यह तय करना होगा कि उसे वर्ल्ड क्लास रेल चाहिए या एक खस्ताहाल रेल सेवा।
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जेटली का कहना है कि भारतीय रेलवे पिछले कुछ साल से घाटे में चल रही है। कई वर्षों से यात्री सेवाओं में हो रहे नुकसान की पूर्ति माल भाड़े की आय से की जा रही थी। लेकिन हाल के वर्षों में माल भाड़े पर भी दबाव बढ़ गया है। रेलवे को बचाने का एक ही तरीका है कि यात्री जिन सुविधाओं का लाभ उठाते हैं उनके लिये भुगतान करें। उनका कहना है कि बेहतर रेल सेवाएं मुहैया कराने के लिए किराए में वृद्धि जरूरी थी।

रेल मंत्री के सामने यही विकल्प था कि वह रेलवे को उसकी हालात पर छोड़ दें और इसे कर्ज के जाल में फंसने दे या फिर किराया बढ़ाकर स्थिति संभाली जाए।

'यूपीए ने लिया था किराया बढ़ाने का फैसला'

रेल किराए में 14.2 फीसदी और मालभाड़े में 6.5 फीसदी बढ़ोतरी का देश भर में कड़ा विरोध शुरू हो गया है। सोशल मीडिया पर भी मोदी सरकार के इस फैसले के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अच्छे दिनों का नारा देकर सत्ता में आई मोदी सरकार पर सबसे ज्यादा निशाना इसी मुद्दे पर साधा जा रहा है। लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस निर्णय का बचाव कर संकेत दिया है सरकार अब इस फैसले से पीछे नहीं हटेगी।

जेटली ने लिखा है कि यूपीए के राज में पांच फरवरी को रेलवे बोर्ड ने यात्री किराए में 10 फीसदी और माल भाड़े में पांच फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव दिया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री ने एक मई से रेल किराए बढ़ाने की मंजूरी दी थी। चुनावी नतीजों की घोषणा के दिन 16 मई को रेलवे बोर्ड ने बढ़े किरायों की अधिसूचना जारी भी कर दी थी, लेकिन उस समय रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे ने देर शाम यह आदेश रोक दिया था, जिससे कि फैसले को लागू करने की जिम्मेदारी केंद्र में आने एनडीए की सरकार के रेल मंत्री पर पड़े।

क्या अब नहीं आ रही अहंकार की बू: कांग्रेस

कांग्रेस ने रेल किराए में वृद्धि का बचाव करने के लिए वित्त मंत्री अरुण जेटली पर निशाना साधा है। पार्टी के मीडिया विभाग के प्रमुख अजय माकन ने पिछले साल रेल किराए के मसले पर नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट पर चुटकी लेते हुए पूछा कि इस मामले में अब एनडीए सरकार का क्या रुख है।

मोदी ने ट्वीट किया था कि ‘महंगाई जैसे मुद्दे उन्हें (कांग्रेस) को चिंतित नहीं करती’।

माकन ने शनिवार को एक ट्वीट में लिखा, ‘मोदी जी ने 26 अक्टूबर 2013 को ट्वीट किया था कि महंगाई जैसे मुद्दे उन्हें चिंतित नहीं करते। वे अपने अहंकार में किसी भी चीज का समाधान नहीं करना चाहते। अब क्या हो रहा है....’ बाद में रिपोर्टरों से बातचीत में माकन ने कहा कि जेटली ने शनिवार को जो कहा, क्या इससे उसी अहंकार की बू नहीं आ रही है जिसे 2013 में मोदी को लगता था।
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रोजाना नौ सौ करोड़ का घाटा भरते कैसे: सिन्हा

रेलवे को रोजाना नौ सौ करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा था। ऐसे में किराया और भाड़ा बढ़ाने के सिवाय कोई चारा नहीं था। किराए में दस फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव पिछली यूपीए सरकार का ही था। चुनाव आचार संहिता के चलते यूपीए सरकार बढ़ी दरें लागू नहीं कर सकी थी। जब भी डीजल-पेट्रोल की कीमतें बढ़ती हैं तो रेल किराया बढ़ता है। ये बातें केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा ने कही।

वह शनिवार को भाजपा के गुलाबबाग स्थित कार्यालय में आयोजित अभिनंदन समारोह के दौरान पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि रेल महकमे में कई सकारात्मक परिवर्तन करते हुए वाराणसी के लिए विस्तृत योजना तैयार की जा रही है।

आने वाले दिनों में देश के अच्छे रेल नेटवर्क में काशी का महत्वपूर्ण स्थान होगा। आगामी रेल बजट में काशी और पूर्वांचल की जनता की जो अपेक्षाएं हैं, पूरी होंगी। रेलवे से भ्रष्टाचार खत्म करने की दिशा में भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। वाराणसी में रेलवे आरक्षण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हैं। इसके लिए पारदर्शी नीति बनाई जाएगी।
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