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उत्तरी कमान के कमांडरों को सेनाध्यक्ष ने जमकर फटकारा

Fri, 09 Aug 2013 12:11 AM IST
नई दिल्ली/गुंजन कुमार
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नियंत्रण रेखा (एलओसी) के भीतर घुस कर पाकिस्तानी सेना के विशेष दस्ते एसएसजी के सफल ऑपरेशन से सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह बेहद नाराज हैं।
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सोमवार की रात हुए ताजा हमले के बाद हालात का जायजा लेने पुंछ गए जनरल सिंह उत्तरी कमान के अधिकारियों पर जम कर बरसे।

उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक उन्होंने आधारभूत सवाल उठाया कि एलओसी पर ऐसे ही कमांडो ऑपरेशन को रोकने के लिए लगे माइंस और रात में भी कारगर तरीके से काम करने वाले एचएचटीआई दूरबीन की सुविधा के बावजूद वह एसएसजी ऑपरेशन को क्यों नहीं रोक पा रहे।

एसएसजी पाक सेना का वही कमांडो दस्ता है, जिसकी जानकारी बृहस्पतिवार को रक्षा मंत्री एके एंटनी ने सदन के दोनों सदनों को दी है।

जनवरी में इसी एसएसजी ने मेंडर इलाके में एलओसी के भीतर घुस कर दो जवानों की हत्या कर दी थी और एक का सिर काट कर अपने साथ ले गए थे।

सेना के सूत्रों के मुताबिक पाक सेना के स्पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) ने इस ऑपरेशन के लिए कम से कम पंद्रह दिन की तैयारी की होगी।

इस दौरान वह एलओसी के इस तरफ बिछे माइंस (जमीन के नीचे छुपा कर रखा गया बम) से बचते रहे। इतना ही नहीं हैंड हेल्ड थर्मल इमेजरी (एचएचटीआई) जैसे उच्च तकनीक वाली दूरबीन भी इतने दिनों तक इन्हें नहीं पकड़ सकी।
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सूत्रों ने बताया कि पाक सेना और आतंकियों की करीब बीस की टुकड़ी के एलओसी के चार सौ मीटर भीतर घुस जाने और पांच जवानों को मार कर बिना घायल हुए वापस चले जाने का मतलब है कि वहां सब कुछ ठीक नहीं है।

इस ऑपरेशन में एसएसजी ने स्वचालित बंदूक का इस्तेमाल किया है क्योंकि पांचों जवानों के शरीर गोलियों से छलनी पाए गए हैं।

जनरल सिंह ने इस पूरे हालात से रक्षा मंत्री ए के एंटनी को अवगत कराया है। साथ ही उन्होंने उत्तरी कमान को इस सेक्टर में पाकिस्तानी हरकत को काबू करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया है।
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सूत्रों के मुताबिक बिक्रम सिंह ने यह सवाल भी उठाया कि जनवरी में जवान के सिर काटने की घटना के बाद तय एसओपी (स्टैन्डर्ड ऑपरेशनल प्रोसिजर) का पालन क्यों नहीं किया गया।

सेना सूत्रों के मुताबिक एसएसजी में पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और कारगिल की लड़ाई के जिम्मेदार परवेज मुशर्रफ ने नई जान फूंकी थी।

दरअसल एसएसजी पाक सेना का कमांडो दस्ता है जिसकी ताकत 2004 तक सिर्फ तीन बटालियन की थी।

मुशर्रफ ने 2004 से 2006 की बीच इसकी चार नई बटालियनें खड़ी की। इसे टुकड़ों में बांट कर इसी तरह के विशेष ऑपरेशन के लिए खासतौर पर तैयार किया गया है।
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