फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुकना घोटाला: वीके सिंह की भूमिका पर उठे सवाल

विज्ञापन
विज्ञापन
पश्चिम बंगाल के सुकना भूमि घोटाले में एक अहम फैसला देते हुए आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्युनल ने शुक्रवार को लेफ्टिनेंट जनरल पीके रथ को निर्दोष करार देते हुए उनका कोर्ट मार्शल रद्द कर दिया।
विज्ञापन


ट्रिब्युनल ने वर्ष  2011 के इस मामले में वस्तुत: पूर्व सेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री वीके सिंह की भूमिका पर सवाल उठा दिए हैं।

रथ सेना में थ्री स्टार रैंक के पहले अधिकारी थे, जिन्हें 2011 में कोर्ट मार्शल झेलना पड़ा था। 2011 में पश्चिम बंगाल के सुकना में सेना छावनी के बगल के 70 एकड़ के प्लाट पर शैक्षिक संस्थान बनवाने के लिए एक निजी बिल्डर को अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया था।

2008 में यह मामला सामने आया था, उस समय जनरल वीके सिंह पूर्वी कमान के प्रमुख थे। सैन्य ट्रिब्युनल की जस्टिस सुनील हाली की अध्यक्षता वाली पीठ ने फैसले में कहा, ‘याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से मुक्त किया जाता है।
विज्ञापन

विज्ञापन

सेना पर एक लाख रुपये का जुर्माना

वह 12 प्रतिशत ब्याज के साथ सभी सुविधाओं को हासिल करने के हकदार हैं। ट्रिब्युनल ने इसके साथ ही रथ के सम्मान को नुकसान पहुंचाने के लिए सेना पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

रथ की याचिका में लगाए आरोप लगाए थे कि जनरल वीके सिंह ने जानबूझकर इस मामले को कुछ ज्यादा ही तूल दिया क्योंकि तत्कालीन सैन्य सचिव लेफ्टिनेंट जनरल अवधेश प्रकाश के साथ उनके गंभीर मतभेद थे।

जनरल सिंह अपने जन्म तिथि विवाद के पीछे अवधेश प्रकाश को ही जिम्मेदार मानते थे। उनकी यह याचिका स्वीकार करते हुए ट्रिब्युनल ने कहा कि मामले में कुछ गवाहों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे, लेकिन उन्हें सेना की ओर से उन्हें हल्की सजा दी गई।

इतना ही नहीं, कुछ गवाहों के जनरल कोर्ट मार्शल में बयान दर्ज होने के बाद उन्हें सजा देने के बजाय सेनाध्यक्ष ने उनका प्रमोशन भी कर दिया।
मालूम हो कि रथ और लेफ्टिनेंट अवधेश प्रकाश को इस मामले में कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा था, लेकिन रथ को पहले सजा दी गई थी। रथ ने फैसले को ट्रिब्युनल में चुनौती दी थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें