फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नए सीवीसी, जिनकी वजह से गई थी गडकरी की कुर्सी

विज्ञापन
विज्ञापन
आखिरकार करीब नौ महीने से खाली पड़े सीवीसी के पद पर नई तैनाती कर दी गई। सीबीडीटी के पूर्व प्रमुख केवी चौधरी नए केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) बनाए गए हैं।
विज्ञापन


केवी चौधरी के करियर की बात करें तो वो भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के पूर्व अधिकारी हैं। वह इस समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा काले धन पर गठित एसआईटी (विशेष जांच दल) के सलाहकार हैं।

केवी चौधरी पिछले साल अक्टूबर में ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे।

अंग्रेजी समाचार पत्र इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जून 2014 में जब चौधरी आयकर विभाग की जांच समिति के सदस्य के तौर पर थे तो उन्होंने नितिन गडकरी की फर्म में छापेमारी के आदेश दिए थे।
विज्ञापन

गडकरी और जयललिता के खिलाफ की जांच

केवी चौधरी ने रिटायरमेंट से 4 महीने पहले ये कदम उठाया। उनके इस फैसले के बाद ही गडकरी को भाजपा के अध्यक्ष पद से हटना पड़ा था।

इससे कुछ साल पहले उन्होंने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के खिलाफ जांच में भी अहम भूमिका अदा की थी। जयललिता के खिलाफ उन्होंने जांच के साथ-साथ छापेमारी भी की थी। उनके इन्ही कार्यों की वजह से नई सरकार ने उन पर भरोसा जताया।

केवी चौधरी इस साल 61 साल के हो जाएंगे। केवी चौधरी की सीवीसी के पद पर नियुक्ति के साथ ही सरकार ने पहली बार किसी आईएएस को यह पद दिए जाने की परंपरा तोड़ दी।

1964 में गठन के बाद से ही इस भ्रष्टाचार रोधी निकाय के प्रमुख के तौर पर आईएएस अधिकारी की नियुक्ति होती रही है।

भारतीय राजस्व सेवा के 1978 बैच के अधिकारी

केवी चौधरी भारतीय राजस्व सेवा के 1978 बैच के अधिकारी हैं। अगस्त में उन्होंने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष पद संभाला और करीब 2 महीने तक इस पद पर रहे।

जिस समय उनका सीबीडीटी चेयरमैन के तौर पर काम कर रहे थे, हाई प्रोफाइल टैक्स मामलों को लेकर राजस्व विभाग और सीवीसी को उनके खिलाफ कई शिकायतें मिली थी।

उस समय चौधरी लगातार तत्कालीन सतर्कता आयुक्त राजीव के चक्कर लगाते नजर आते थे। राजीव 1975 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। राजीव अक्टूबर 2014 तक कार्यकारी सीवीसी के पद पर तैनात थे।

केवी चौधरी के बारे में जानकारी ये भी है कि जब वो आयकर विभाग की जांच टीम में थे उस समय जून-जुलाई के दौरान उन्होंने मांस निर्यातक मोइन कुरैशी के खिलाफ टैक्स मामले को जांच अभियान चलाया था। उन्होंने तत्कालीन सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा के साथ मिलकर पूरे मामले में विशेष रोल अदा किया था।

कालेधन मामले की जांच में अहम रोल

केवी चौधरी के प्रभाव पर गौर करें तो माथे पर लाल टीका और साधारण कपड़ों के साथ-साथ उनका अंदाज बेहद सामान्य रहता है। चौधरी के मुताबिक वित्त मंत्री अरूण जेटली उनसे बेहद प्रभावित हैं। उनकी जेटली से मुलाकात एनडीए सरकार के गठन के दौरान हुई थी।

मोइन कुरैशी मामले के चलते भी चौधरी ने जेटली को प्रभावित किया। जेटली ने भी कहा है कि हम ऐसे अधिकारियों को आगे लाना चाहते हैं जिनकी शख्सियत बेहद खास है।

हालांकि जेटली के विरोधियों ने एचएसबीसी मामले और स्विस बैंक में अकाउंट रखने वालों के मुद्दे पर कई बार उन्हें घेरने की कोशिश की। काले धन मामले में चौधरी 2011 तक जांच में जुटे रहे हैं।

पहले वो आयकर विभाग दिल्ली के महाप्रबंधक के तौर पर इस ओर काम किया और फिर सदस्य के तौर पर अगस्त 2012 तक जांच में जुटे रहे।

सीवीसी की नियुक्ति में जेटली का अहम रोल

कहा जा रहा है कि जेटली से मुलाकात के दौरान चौधरी ने काले धन मुद्दे पर कई अहम जानकारियां मुहैया कराई। यहां तक उन्होंने मामले से जुड़े कई तथ्य बिना फाइलों के ही सामने रख दिया।

इसके साथ-साथ चौधरी एचएसबीसी जांच में कॉन्फ्रेंस कॉल्स के जरिए जुड़े रहे। आयकर विभाग से जुड़े रहने के दौरान दौरान उन्होंने राजनीति से जुड़े गंभीर मामलों की जांच में भी अहम रोल निभाया। इसमें वीरभद्र सिंह के खिलाफ मामला अहम है।

सूत्रों के मुताबिक केवी चौधरी के बारे में कहा जाता है कि वो अरूण जेटली के कान हैं। मंत्री के दबाव में ही उन्हें सीबीडीटी का चेयरमैन बनाया गया। इसके साथ ही चौधरी को कालेधन मामले में बनी एसआईटी की सलाहकार समिति में भी विशेष तौर पर शामिल किया गया।

जेटली के करीबियों में शुमार

ये केवी चौधरी वर्चस्व का ही असर है कि रिटायरमेंट के बाद भी आयकर विभाग की जांच समिति के सदस्य के तौर पर नॉर्थ ब्लॉक में उनके लिए खास जगह मुहैया कराई गई है।

वित्त मंत्री अरूण जेटली ने ही उनका नाम सीवीसी के तौर पर पेश किया। हालांकि पीएमओ के अधिकारियों, कैबिनेट सचिव और कई आईएएस अधिकारियों ने इसके खिलाफ आवाज उठाई।

इस बारे में कहा गया कि ये पद हमेशा आईएएस अधिकारियों के लिए है ऐसे में चौधरी की नियुक्ति कैसे हो सकती है। इसके बाद जेटली मामले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास लेकर गए।

उन्होंने ये मुद्दा उठाते हुए कहा कि अगर ऐसा कोई नियम है तो इसे बदल कर एक नॉन आईएएस को भी इस पद पर नियुक्ति की बात कही।

हालांकि जैसे ही चौधरी की नियुक्ति सरकार ने तय की जाने-माने वकील प्रशांत भूषण ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर ये जानकारी मांगी कि आखिर उनकी नियुक्ति क्यों की गई?

प्रशांत भूषण ने नियुक्ति पर उठाए सवाल

प्रशांत भूषण सीवीसी की नियुक्ति में पारदर्शिता की जांच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक केस भी लड़ रहे हैं। भूषण का ये केस पिछले सीवीसी पीजे थॉमस से जुड़ा हुआ है। उनके बारे में जानकारी है कि उनका नाम 20 साल पुराने एक केस में शामिल है। इसके बाद भी उन्हें आईबी और सीबीआई ने क्लिन चिट दे दिया।

चौधरी के बारे में भूषण ने कहा है कि उनका नाम पूर्व सीबीआई निदेशक रंजीत सिन्हा की डायरी में भी था। उन्होंने इशारा किया है कि सुप्रीम कोर्ट को सीवीसी से इस मामले में जांच को लेकर जरूरी निर्देश देने चाहिए।

इस डायरी में जो सूचनाएं हैं उसमें सबसे अहम केवी चौधरी के दौरान हुई स्टॉक गुरु पोंजी घोटाले की जांच और मोइन कुरैशी जांच को फिर से कराने की जरूरत है।
विज्ञापन

जेटली-रोहतगी के मनाने पर मानें प्रधानमंत्री

हालांकि आयकर विभाग ने कुरैशी मामले में रंजीत सिन्हा को क्लीन चिट दे चुकी है वहीं स्टॉक गुरु मामले में केवी चौधरी को भी क्लिन चिट दी है। भूषण ने इसी मुद्दे पर सवाल उठाए हैं।

इसके साथ ही प्रशांत भूषण ने चौधरी को नीरा राडिया टेप मामले में और पोंटी चड्ढा को 200 करोड़ के टैक्स फायदे के मुद्दे पर भी कटघरे में खड़ा किया है।

हालांकि भूषण के लगाए गए इन सभी आरोपों पर वित्त मंत्री अरूण जेटली और अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने प्रधानमंत्री को विश्वास दिलाया कि चौधरी के खिलाफ कोर्ट कोई भी मामला स्वीकार नहीं करेगी।

जेटली और रोहतगी के समर्थन के बाद प्रधानमंत्री मोदी केवी चौधरी को सीवीसी बनाने के लिए राजी हुए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें