दुष्कर्म के मामलों में कड़ा कानून बनाने के लिए लाए गए बिल पर मंगलवार को भी कैबिनेट में सहमति नहीं बन पाई। कैबिनेट में बिल के कई बिंदुओं पर विभिन्न मंत्रालयों के बीच मतभेद नजर आए।
सरकार ने बिल के मसौदे को पुनर्विचार के लिए मंत्री समूह (जीओएम) को सौंप दिया है। 14 मार्च को इस मसले पर मंत्री समूह की बैठक में चर्चा की जाएगी, इसके बाद इसे कैबिनेट में दोबारा लाया जाएगा। मंत्री समूह में वित्त मंत्री, गृह मंत्री, कानून मंत्री और महिला एवं बाल विकास मंत्री को शामिल किया गया।
बताया जा रहा है कि मंत्रियों के बीच सबसे बड़ा मतभेद इस बात पर था कि सहमति से सेक्स की उम्र 18 साल बरकरार रखी जाए या फिर इसे घटाकर 16 साल कर दी जाए।
गौरतलब है कि बीते दिसंबर में दिल्ली में हुई गैंगरेप की घटना के बाद महिलाओं के खिलाफ हिंसा से जुड़े कानून में बदलाव को लेकर जस्टिस जेएस वर्मा समिति, जस्टिस उषा मेहरा कमीशन और संसद की स्थायी समिति ने कई सिफारिशें दी हैं।
जिसके बाद केंद्र सरकार ने अपराध संशोधन कानून बिल लेकर आई है। महिला उत्पीड़न के खिलाफ सख्त कानून को लागू करने की देशव्यापी मांग के दबाव में सरकार इस बिल को संसद के इसी सत्र में पास करवाना चाह रही है।
बलात्कार के बाद हत्या के जघन्य मामलों में फांसी और पुलिस व प्रशासनिक तंत्र को महिलाओं के प्रति संवेदनशील बनाने के मुद्दे पर आम सहमति के बावजूद कई मामलों में मंत्रालयों में मतभेद उभर कर सामने आए हैं।
बलात्कार की जगह महिला यौन उत्पीड़न जैसे शब्द के इस्तेमाल पर कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय ने विरोध किया है। नाबालिग की उम्र सीमा को 18 से घटाकर 16 साल किए जाने पर भी महिला व बाल कल्याण, गृह और कानून मंत्रालय में सहमति नहीं बना पा रही है।