अन्ना हजारे नई सियासी पारी खेलने की रणनीति तैयार करने में जुटे हुए हैं। वे इसके लिए सितंबर में जन संसद बुलाने की तैयारी कर रहे हैं।
इसमें सियासत में प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष भागीदारी पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। वैसे जन संसद बुलाने से पूर्व अन्ना इस संबंध में अपने सहयोगियों के साथ ही देशभर के चुनिंदा लोगों का मन टटोल रहे हैं।
इस क्रम में उन्होंने उर्दू अखबारों से जुड़े पत्रकारों से बातचीत की। बातचीत में उन्होंने सियासत में सीधी भागीदारी की संभावना से इंकार नहीं किया।
हालांकि इस दौरान उन्हें मुंबई और गुजरात में हुए सांप्रदायिक दंगे और उनकी टीम के सदस्यों की गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी से नजदीकी संबंधी सवालों से दो-चार होना पड़ा।
टीम अन्ना के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि अन्ना खुद सक्रिय राजनीति से दूर रहेंगे, मगर वे सितंबर में संभावित जन संसद में व्यवस्था परिवर्तन के लिए नए राजनीतिक विकल्प को हरी झंडी दिखा सकते हैं।
सदस्य के मुताबिक सक्रिय राजनीति में सीधे उतरने के सवाल पर अन्ना को देश भर से अलग-अलग राय मिली है।
राय देने वालों में कई ऐसे हैं जो नई पार्टी बनाने के पक्ष में हैं तो कुछ लोगों का मानना है कि अन्ना को लोकसभा चुनाव के दौरान हर उम्मीदवार के संबंध में अपना विस्तृत नजरिया पेश करना चाहिए।
अगर जन संसद में सीधे सक्रिय राजनीति में उतरने पर सहमति बनी तो अन्ना नई पार्टी के गठन की घोषणा कर सकते हैं।
सूत्रों के मुताबिक जन संसद में अन्ना बाबा रामदेव, श्री श्री रविशंकर सहित जमीनी स्तर पर काम कर रहे कई संस्थाओं के मुखिया को आमंत्रित करेंगे। टीम अन्ना के सभी नए और पुराने सदस्यों को भी आमंत्रित किया जाएगा।