'वेद का आदेश है कि गोहत्या करने वाले पातकी के प्राण ले लो। हम में से बहुतों के लिए यह जीवन मरण का प्रश्न है।' ये बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य ने नोएडा के दादरी में कथित तौर पर गोमांस बनाने के आरोप में पीट पीट कर मार डाले गए अखलाक पर लिखे गए एक लेख में कही है।
'इस उत्पात के उस पार' नामक लेख जो तूफैल चतुर्वेदी द्वारा लिखा गया है। वहीं अंग्रेजी अखबार The Indian Express के मुताबिक इनका असली नाम विनय कृष्ण चतुर्वेदी है। लेख में यह आरोप भी लगाया गया है कि 'मदरसे और मुस्लिम नेतृत्व भारतीय मुस्लिमों को देश परंपराओं से नफरत करना सिखा रहे हैं। अखलाक भी शायद इसी तरह के लोगों के प्रभाव में आया होगा और गाय को काटा होगा।'
लेख में लिखा गया है कि गौ हत्या हमारे लिए बहुत बड़ी बात है। हमारे पूर्वजों ने इसे रोकने के लिए अपना जीवन दांव पर लगाया है। तुफैल के मुताबिक यजुर्वेद के 30 वें अध्याय के 18 वें श्लोक में कहा गया है कि 'गाय की हत्या करने वाले लोगो को मौत की सजा देनी चाहिए।
आपको गोहत्या नहीं दिखाई दी!
लेख में यह भी लिखा गया है कि कई बार ऐसे भी मौके आए हैं जब मुस्लिम आक्रमणकारियों ने हिंदुओं का धर्म परिवर्तन करने के लिए हमारे मुंह में गोमांस भरने की कोशिश की।
इस लेख में उन लेखकों औऱ साहित्यकारों को भी निशाने पर लिया गया है जिन्होंने दादरी काण्ड के बाद अपने पुरस्कार वापस लौटा दिए हैं। लेख में लिखा है कि 'आपको अखलाक द्वारा की गई गोहत्या नहीं दिखाई दी।'
'आपने इस पर भी विचार नहीं किया कि अखलाक की मौत पर हुई पूरी रिपोर्टिंग इस बात का कहीं कोई जिक्र नहीं है कि अखलाक का उसके गांव में उसकी किसी से दुश्मनी नहीं थी।'
काटजू ने मांगा जवाब
वहीं इस लेख के सामने आने के बाद पूर्व न्यायाधीश मार्कण्डेय काटजू ने अपने फेसबुक पेज पोस्ट में लिखा है कि 'क्या संघ मुझे बताएगा कि 'पांचजन्य पत्रिका में कहा गया है कि वेद कहते हैं कि गाय के हत्यारों को मारा जाना चाहिए। लेकिन यह वास्तव में कहां लिखा है? ऋगवेद, यजुर्वेद, सामवेद या फिर अथर्वेद? यह किस मण्डल अथवा ऋचा में लिखा है? या फिर यह यज्ञ और अनुष्ठानों से संबंधित है जो ब्राह्मणों द्वारा लिखा जाता है।'
क्या यह एतरेय ब्राह्मण ग्रंथ, सत्पथ ब्राह्मण ग्रंथ, तैतरेय ब्राह्मण ग्रंथ अथवा गोपथ ब्राह्मण ग्रंथ में लिखा गया है? क्या यह तथ्य कहीं मौजूद है? मैंने वेद कई बार पढ़े हैं लेकिन इसे मैंने कहीं नहीं पढ़ा।