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आईएसआई एजेंट का अमरोहा कनेक्शन

Wed, 20 Aug 2014 12:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अमरोहा
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मेरठ में गिरफ्तार आईएसआई एजेंट आसिफ अली के अमरोहा से तार जुड़े होने के खुलासे के बाद एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं। यहां कौन पाक एजेंट का मददगार हो सकता है, ऐसी जांच के लिए एसटीएफ और इंटेलीजेंस के जासूसों जाल बिछा दिया है। एसटीएफ आसिफ को रिमांड पर लेने के बाद अमरोहा लेकर आ सकती है। जिन जोया और अमरोहा की एसबीआई शाखाओं से पूर्व सैन्य अफसरों को रुपया ट्रांसफर किया गया है वहां पूछताछ की जा सकती है।
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आसिफ अली वर्ष 2007 से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए काम कर रहा था। आसिफ अली ने सेना की सूचनाएं मुहैया कराने के लिए भारतीय सेना के अधिकारियों को रुपये ट्रांसफर करने के लिए एसबीआई की जोया और अमरोहा शाखा को ही क्यों चुना, इसको लेकर एसटीएफ की नजर अमरोहा के संदिग्धों पर लग है। जाल बिछाकर संदिग्धों की तलाश में जुटी एसटीएफ जेल से आसिफ अली को रिमांड पर लेकर अमरोहा आ सकती है। आसिफ के पिता बीड़ी उद्योग से जुड़े हुए थे। अमरोहा भी बीड़ी उद्योग के लिए मशहूर है। लिहाजा कहीं न कहीं पाक एजेंट के यहां से कनेक्शन जरूर होंगे। ऐसा एसटीएफ और खुफिया के अफसरों का मानना है। आसिफ से नजदीकियां रखने वालों की तलाश की जा रही है।

बैंक शाखाओं में भी खलबली
आईएसआई एजेंट आसिफ द्वारा जोया और अमरोहा एसबीआई शाखाओं से कई बार पूर्व सैन्य अफसरों को रुपये ट्रांसफर करने संबंधी एसटीएफ को बयान देने के बाद बैंक शाखाओं में भी खलबली है। हालांकि बैंक अधिकारी ऐसी किसी जानकारी से इनकार कर रहे हैं। सवाल यह है कि यदि बैंक से रुपये ट्रांसफर किए हैं तो खाते भी यहीं होंगे, लेकिन बैंक से जुड़े कुछ अधिकारियों का कहना है बैंकों के इंटरनेट नेटवर्क से जुड़ने के बाद कहीं से अपने खाते के रुपये ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
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आसिफ नाम के खातों की भरमार
बैंक शाखाओं में जानकारी करने पर पता चला कि आसिफ नाम के तमाम खाते हैं, इसमें यह पता लगा पाना मुश्किल है कि पाक खुफिया एजेंट का कौन सा खाता है। हो सकता है कि स्थानीय पता देकर कोई फर्जी एकाउंट खुलवा लिया गया हो।

गंभीर नहीं स्थानीय पुलिस प्रशासन
पाक एजेंट द्वारा अमरोहा और जोया शाखाओं से रुपये पूर्व सैन्य अफसरों के खातों में ट्रांसफर करने की बात सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस और प्रशासन के अधिकारी गंभीर नहीं हैं। इस मामले में अभी तक किसी प्रकार की पूछताछ नहीं कराई गई है। एसपी अनिल कुमार सिंह का कहना है कि हमारे संज्ञान में अभी ऐसा कोई मामला नहीं है। अफसरों द्वारा संज्ञान में लाया जाएगा तो जरूर दिखवाएंगे।
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पाकिस्तान से हैक करके बदला लैपटॉप का आईपी एड्रेस

12वीं पास आईएसआई एजेंट आसिफ अली ने पाकिस्तान में ही आईएसआई से कंप्यूटर चलाने की ट्रेनिंग ली। आईएसआई अफसर जाहिद ने उसे सिखाया कि किस तरह कंप्यूटर के जरिये जुड़ना है और खुद की पहचान छिपाकर रखने के लिए क्या करना है। वहीं जो लैपटॉप झांसी में फौजी के बेटे को दिया गया है, उसका आईपी एड्रेस भी आसिफ से फोन पर संपर्क कर पाकिस्तान में बैठे आईएसआई अफसर जाहिद ने बदल दिया। इस कारण उस लैपटॉप को बरामद करना भी किसी चुनौती से कम नहीं।

आसिफ अली ने मई में जब पीएल शर्मा रोड से लैपटॉप खरीदा, तो उसके साथ ही अलग-अलग कंपनी के दो डोंगल भी खरीदे। इसके बाद जब वह लैपटॉप की सेटिंग चेंज नहीं कर सका, तो पाक अफसर जाहिद से मोबाइल फोन पर बातचीत की। उसी ने आसिफ अली को बताया कि किस तरह से लैपटॉप की सेटिंग बदलनी है।

आसान नहीं है लैपटॉप बरामद होना
आसिफ अली ने जो लैपटॉप झांसी में फौजी के लड़के तक पहुंचाया, वह बरामद होना मुश्किल है। दरअसल, पाक अफसर ने आसिफ से लैपटॉप का मैक नंबर मालूम करके लैपटॉप को रिमोट सेटिंग के जरिये हैक कर लिया। इसके बाद उसका आईपी एड्रेस भी बदल दिया। ताकि सर्च करने पर भी लैपटॉप का पता न चल सके। दरअसल, कंप्यूटर में दो प्रकार के आईपी एड्रेस इस्तेमाल होते हैं। इनमें एक स्टेटिक और दूसरा डीएचसीपी (डायनॉमिक होस्ट कंप्यूटर प्रोटोकॉल) होता है। पर्सनल लैपटॉप में डीएचसीपी आईपी एड्रेस इस्तेमाल किया जाता है, जो इंटरनेट सेवा के जरिये परिवर्तित किया जा सकता है।

फौजी के लड़के का नाम मालूम चला
बबीना कैंट झांसी के फौजी के लड़के का नाम खुफिया विभाग को मालूम चल चुका है। मिलिट्री इंटेलीजेंस की टीम भी इस काम में लगी हुई है, मगर आरोपी युवक को दबोचने से ज्यादा जरूरी लैपटॉप बरामद करना हो गया है। इसकी वजह से संभलकर कदम उठाया जा रहा है।

आसिफ के परिचितों पर भी निगरानी
पुलिस और खुफिया विभाग आईएसआई एजेंट आसिफ अली के परिचितों पर भी निगाह रखे हुए हैं। क्योंकि आसिफ का किन लोगों से मिलना जुलना था और अपने राष्ट्र विरोधी मंसूबों से उसने अन्य कितने लोगों को जोड़ा, यह पता लगाना भी जरूरी हो गया है।
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