अपने दाहिने हाथ अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभार दिलाकर गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिशन उत्तर प्रदेश की औपचारिक शुरुआत कर दी है।
मोदी की योजना राजनीतिक दृष्टि से सबसे अहम इस सूबे में हिंदुत्व के मुद्दे पर वोटों का ध्रुवीकरण कर पार्टी की खस्ता हालत सुधारने की है।
उनकी योजना में हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेताओं की तिकड़ी उमा भारती, अमित शाह और वरुण गांधी अहम भूमिका निभाएंगे।
यही वजह है कि उमा को जहां किसी राज्य की जिम्मेदारी देने से परहेज बरता गया है, वहीं वरुण को पश्चिम बंगाल जैसे भाजपा के जनाधारहीन राज्य का प्रभार दिया गया है।
दरअसल भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार माने जा रहे मोदी ने स्वयं उत्तर प्रदेश में पार्टी की खस्ताहाल हालत को सुधारने का जिम्मा लिया है।
यही कारण है कि उन्होंने हाल ही में राष्ट्रीय महासचिव बनाए गए अपने खास सिपहसालार अमित शाह को इस सूबे की अहम जिम्मेदारी दिलाई है।
सूत्रों का कहना है कि चूंकि शाह गुजरात में मोदी के साथ लंबे समय तक काम करने के कारण उनकी कार्यशैली से परिचित हैं, इसलिए मिशन यूपी के लिए खासतौर से शाह को चुना गया है।
अब मोदी शाह के माध्यम से यहां अपनी रणनीति को अमली जामा पहनाएंगे। हिंदु वोटों के ध्रुवीकरण के लिए मोदी चुनाव से पहले इस राज्य की ताबड़तोड़ यात्रा कर सकते हैं।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में पार्टी विशुद्ध रूप से हिंदुत्व के मोर्चे पर ही चुनाव मैदान में उतरेगी। यह फैसला कुछ माह पहले ही हो गया था।
इसी रणनीति के तहत सूबे में मोदी को जहां प्रमुख चेहरा बनाया जा रहा है वहीं हिंदुत्व के फायर ब्रांड नेताओं को भी यहां पूरी तरह झोंकने की तैयारी की गई है।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि दरअसल इन नेताओं को महत्वपूर्ण राज्य की जिम्मेदारी दी जानी तय थी, लेकिन ऐन वक्त पर फैसला हुआ कि चूंकि इन्हें उत्तर प्रदेश पर मुख्य रूप से फोकस करना है, इसलिए इन्हें अहम जिम्मेदारियों से दूर रखा जाए।
'अमित शाह को प्रभारी बनाना अपराध नहीं'
इधर भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने नरेंद्र मोदी के खास अमित शाह को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त करने के अपने फैसले का बचाव किया है।
उन्होंने कहा कि अमित शाह को जिम्मेदारी सौंपना कोई अपराध नहीं है और यह फैसला किसी दबाव में नहीं लिया गया है।
राजनाथ ने कहा, ‘वह पार्टी के महासचिव हैं और देश के सबसे सफल राज्य में मंत्री भी रह चुके हैं। मुझे लगता है कि उन्हें प्रभारी बनाकर मैंने कोई अपराध नहीं किया है।’
अमित शाह गुजरात में गृह मंत्री थे। हालांकि सोहराबुद्दीन फर्जी एनकाउंटर में उन्हें भी आरोपी बनाया गया है। राजनाथ ने इस बात को भी खारिज किया कि यह फैसला उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के दबाव में लिया है।
उन्होंने कहा कि मोदी ने किसी के नाम की सिफारिश नहीं की और यह कहना पूरी तरह से गलत है कि अमित शाह को जिम्मेदारी देने के पीछे मोदी का हाथ है।