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मोदी के चहेते अफसर की नियुक्ति को हरी झंडी

Mon, 14 Jul 2014 03:09 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चहेते ब्यूरोक्रेट और ट्राई के पूर्व चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा को प्रधानमंत्री का प्रधान सचिव बनाने के वैधानिक रोड़े हटते नजर आ रहे हैं। ट्राई संशोधन बिल सोमवार को लोकसभा में पास हो गया है।
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ट्राई कानून के मुताबिक चेयरमैन या सदस्य रह चुका व्यक्ति पद छोड़ने के बाद कोई सरकारी पद नहीं ले सकता है। वह पद छोड़ने के दो साल बाद तक कोई व्यावसायिक पद भी नहीं ले सकता।

गौरतलब यह है कि मोदी सरकार के इस पहले संशोधन बिल को लोकसभा में भारी समर्थन मिला। विपक्षी दल कांग्रेस, राजेडी और जेडीयू, वाम दलों को छोड़कर लगभग सभी दलों ने इस संशोधन बिल का लोकसभा में समर्थन किया। सरकार के इस संशोधन बिल को लोकसभा में समर्थन देने वाली पार्टियों ने राज्य सभा में भी समर्थन देने की बात कही है।
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कौन हैं नृपेंद्र मिश्रा?

भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई के पूर्व अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा उत्तर प्रदेश कैडर के 1967 बैच के आईएएस अधिकारी हैं।

प्रधान सचिव के रूप में मिश्रा का कार्यकाल प्रधानमंत्री के कार्यकाल के साथ या अगले आदेश के बाद खत्म होगा। 69 वर्षीय मिश्रा वर्ष 2009 में ट्राई के अध्यक्ष पर से रिटायर हुए थे।

आईएएस अधिकारी के रूप में वे कई सरकारों में वि‌‌भिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। मिश्रा के बारे में मशहूर है कि वे अपने लक्ष्यों को रिकार्ड समय में पा लेते हैं और उत्कृष्टता के मामले में भी उनका कोई सानी नहीं है।
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मोदी सरकार में बने प्रधान सचिव

प्रधान सच‌िव के रूप में मोदी सरकार के हर काम-काज पर मिश्रा की नजर होगी। 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में भाजपा की पहली सरकार यानी पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के कार्यकाल में वे भी वे प्रधान सचिव थे।

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए नृपेंद्र मिश्रा ने सिंगल विंडो सिस्टम का सुझाव दिया था। प्रशासनिक सुधारों में कल्याण की भी रुचि थी, नृपेंद्र के प्रस्ताव से वे बहुत प्रभावित हुए थे।

हालांकि, उन दिनों संघ मिश्रा की कार्यशैली से बहुत नाराज रहता था। संघ के मुखपत्र 'पांचजन्य' में मिश्रा के खिलाफ एक आलेख भी छपा था, जिसमें उन्हें अमेरिका का करीबी बताया गया था।
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