साहित्य का वर्ष 2013 का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार कनाडा की लेखिका एलिस मुनरो को दिया जाएगा। 82 वर्षीय मुनरो साहित्य का नोबेल जीतने वाली 13वीं महिला हैं जबकि किसी भी क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाली वह 44वीं महिला हैं।
साढ़े बारह लाख अमेरिकी डॉलर के पुरस्कार की घोषणा करते हुए स्वीडिश अकादमी ने मुनरो को ‘लघुकथाओं की मल्लिका’ बताया है।
अकादमी ने कहा है कि मुनरो की कहानियां अक्सर छोटे शहरों के माहौल पर आधारित होती हैं जहां अस्तित्व की सामाजिक स्वीकार्यता का संघर्ष तनावपूर्ण संबंधों को जन्म देता है।
ऐसी समस्याएं जो पीढ़ियों के अंतर और महत्वाकांक्षा के टकराव से पैदा होती हैं। कुछ आलोचक मुनरो को कनाडाई चेखव भी कहते हैं।
कनाडा के विंघम में 10 जुलाई, 1931 में जन्मी मुनरो ने 1950 में पत्रिकाओं में लिखना शुरू किया था। उनका पहला कहानी संग्रह ‘डांस आफ हैप्पी शेड्स’ 1968 मे प्रकाशित हुआ।
उनका ताजा कहानी संग्रह ‘डीयर लाइफ’ पिछले साल प्रकाशित हुआ। अंग्रेजी के अलावा मुनरो फ्रेंच, स्वीडिश, स्पेनिश और जर्मन में भी लिखती रही हैं।
मुनरो को वर्ष 2009 में बुकर पुरस्कार भी मिला था जबकि तीन बार उन्हें कनाडा के ‘गवर्नर जनरल अवार्ड’ से नवाजा गया है। दिलचस्प यह है कि मुनरो खुद कहानीकार के बदले उपन्यासकार बनना चाहती थीं।
इस साल एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा था कि अपनी पहली पांच किताबें लिखते समय मैं प्रार्थना कर रही थी कि काश मैं उपन्यास लिखती।
स्टॉकहोम में 10 दिसंबर को होने वाले समारोह में मुनरो को पुरस्कार से नवाजा जाएगा। पिछले साल साहित्य का नोबेल चीन के उपन्यासकार मो यान को मिला था।