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सपा का एक सालः मुलायम बने मास्साब, अखिलेश बने छात्र

Fri, 15 Mar 2013 09:49 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
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वजह लोकसभा चुनाव में बाजी मारने की चिंता हो या समाजवादी पार्टी की छवि को बदलने की चिंता हो। प्रयास चाहे पुत्र अखिलेश के पैर राजनीति में मजबूती से जमाने का हो अथवा पूर्ण बहुमत से बनी पहली सरकार के जरिए व्यवस्था परिवर्तन के संकल्प को साकार करने का।
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मुलायम सिंह यादव इस बार मास्टर साहब (शिक्षक) की भूमिका में दिखाई पड़े। कभी सरकार को फटकारते तो कभी पुचकारते। छवि सुधारने की कोशिश करते हुए तो कभी समझाते हुए। चुनाव नतीजे आने के बाद से प्रदेश सरकार को लेकर मुलायम कुछ इसी रूप में लोगों को दिखे।

कुछ यूं दिखे मुलायम

अखिलेश सरकार बनने के आसार दिखने के साथ ही उन्होंने स्वत: अपनी यह भूमिका तय कर ली। कहीं किसी मंत्री या सरकार के कामकाज से कार्यकताओं को नाराजगी हुई तो मुलायम ने कार्यकर्ताओं को पुचकारा और समझाया। जरूरत हुई तो सरकार की खिंचाई भी कर दी।
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देखा कार्यकर्ता इतने भर से संतुष्ट नहीं होंगे तो मंत्रियों को डपट भी लगा दी। लालबत्ती वापस ले लेने की चेतावनी देने में भी देर नहीं लगी। ठीक वैसे ही जैसे राजनीति में आने से पहले वह अपनी कक्षा के विद्यार्थियों को डांटते, डपटते व पुचकारते रहे होंगे।

आज्ञाकारी शिष्य में नजर आए अखिलेश

अखिलेश ने भी पुत्र से ज्यादा शिष्य के रूप में मुलायम की आज्ञा का पालन किया। सरकार को कैसे चलाना है। मंत्रिपरिषद में कौन रहेगा। सरकार में किसकी क्या भूमिका होगी। क्या फैसले लेने हैं। कब कहां क्या करना है। सरकार की नीति कैसी रहेगी। इन सब सवालों पर सरकार के फैसले मुलायम के नजरिये पर ही हुए।

निजी जीवन में भी मुलायम सिंह को पिता के बजाय 'नेता जी' संबोधन से पुकारने वाले अखिलेश ने पिछले एक साल में शायद ही कोई ऐसी घोषणा की हो, जिसमें उन्होंने 'नेताजी' का नाम न लिया हो।

छवि बदलने की कोशिश

जैसे कोई शिक्षक अपने स्कूल के छात्रों में भी ज्यादातर की आदत से परिचित होता है। मुलायम भी सपा के लोगों की चाल-ढाल से स्वाभाविक रूप से परिचित थे। शायद इसीलिए उन्होंने चुनाव के नतीजे आने के साथ ही अपनी पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की छवि सुधार पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया।

साथ ही सरकार और कार्यकर्ताओं से संवाद खत्म न हो जाए, इसके लिए उन्होंने पार्टी कार्यालय पर मंत्रियों के बैठने का दिन तय कराया। दिल्ली में अगर संसद का सत्र नहीं चल रहा है तो खुद कार्यालय पर बैठककर कार्यकर्ताओं से मिलना शुरू किया।

किसी ने कोई शिकायत की तो तुरंत उस पर आश्वासन ही नहीं बल्कि संबंधित व्यक्ति को झाड़ लगाने में भी देर नहीं लगाई। पार्टी का झंडा, पोस्टर व स्टिकर के दुरुपयोग पर भी उन्होंने एक बार नहीं कई बार हिदायतें दी।

आचरण व काम पर कोई अंगुली न उठाने पाए

राजनारायण की जयंती पर मुलायम सिंह ने पार्टी मुख्यालय पर सार्वजनिक रूप से कहा कि विधायकों और मंत्रियों के आचरण पर कोई अंगुली नहीं उठा पाए। मैं चाहता हूं कि यूपी की मौजूदा सरकार आदर्श सरकार कही जाए। यूपी से प्रेरित होकर देश भर की सरकारें काम करें। सरकार को किसानों, जवानों, नौजवानों और गरीबों के हित को ध्यान में रखकर काम करना चाहिए।


सरकार व पार्टी के बारे में दे बेहतर संदेश

सरकार और सत्तारूढ़ दल के बारे में समाज में बेहतर संदेश देने की जिम्मेदारी विधायकों व मंत्रियों की है। अगर इनका व्यवहार ठीक रहेगा तो लोगों का सरकार व संगठन पर भरोसा बढ़ेगा। साथ ही लोकसभा चुनाव में भी विधानसभा की तरह बढिय़ा नतीजे आएंगे।

अगर व्यवहार ठीक नहीं रहा और जनता में संदेश ठीक नहीं गया तो लोकसभा चुनाव के नतीजे भी ठीक नहीं रहेंगे। न खुद ऐसा कोई काम करें और न किसी को करने दें, जिससे सरकार या संगठन की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़े।

कार्यकर्ताओं को नसीहत

कुछ अखबार और चैनलों ने सपा के विरोध को धंधा बना लिया है। उन्होंने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे ऐसी खबरों पर विश्वास न करें। सरकार के खिलाफ खबरें छापने वालों को महत्व न दें। ऐसे लोगों को जवाब दें।

सरकार लगातार किसानों, जवानों, नौजवानों और गरीबों के हित की काम करती जा रही है और आगे और तेजी से करेगी। उन्होंने किसानों के कर्जमाफी को ऐतिहासिक निर्णय करार दिया।

मुलायम के बयान

विजय जुलूस न निकाले जाएं। मंत्री विजय जूलूसों में भाग न लें। विजय जूलूसों में फायरिंग हुई तो मंत्रियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बरखास्त भी किया जा सकता। इस तरह की घटनाओं को बरदाश्त नहीं किया जाएगा। (19 मार्च को पत्रकार वार्ता में)

मंत्री ऐसा काम करें जो जमीन पर दिखाई दे। साथ ही जनता को लगे कि सूबे में वास्तव में बदलाव हो चुका है। कार्यकर्ताओं की बात सुनी जाए और जनता की समस्याओं के समाधान में तत्परता लाई जाए। ज्यादातर मंत्री अभी पार्टी की कसौटी पर खरे नहीं उतरे हैं। न सुधरे तो लालबत्ती वापस हो सकती है।-(31 जुलाई को विधायकों की बैठक में )

सावधान रहना अखिलेश! सरकार की छवि अच्छी होनी चाहिए। तुम्हारी (अखिलेश की) छवि तो जनता के बीच ठीक है लेकिन तुम्हारे सहयोगियों की भी छवि अच्छी होनी चाहिए। जनता को सरकार से निराश न होने दें। जनता बहुत समझदार हो गई है, वह निराश हो गई तो बहुत गलत होगा। बड़ा अवसर हम लोगों के हाथ से निकल जाएगा। (25 नवंबर, लोकनायक राजनारायण के जन्म दिवस पर)

सत्ता में आने के बाद हमारी जिम्मेदारी बढ़ जाती है। किसी को सत्ता का घमंड नहीं करना चाहिए। हम सभी को अपना आचरण ठीक रखना चाहिए। चरित्र बेदाग रहना चाहिए। पार्टी में अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है। ( 01 जनवरी को कार्यकर्ताओं से)

अखिलेश का बयान
'नेता जी हम सबके नेता हैं। उन्हें नाराज होने का अधिकार है। निर्देश देने का भी अधिकार है। अगर वह नाराज हैं तो हम लोगों की कुछ न कुछ गलती होगी। उनकी नाराजगी दूर की जाएगी। इसके लिए उनकी इच्छानुसार काम करने की कोशिश की जाएगी। साथ ही जहां कहीं अभी तक गलती हुई होगी उसे भी दुरुस्त किया जाएगा। अखिलेश यादव मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश (१ अगस्त को एक कार्यक्रम में पत्रकारों के सवाल पर )
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