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एम्स के डॉक्टरों का कमाल 'अनहोनी को किया होनी'

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एम्स के 100 से अधिक चिकित्सकों, नर्सों और अन्य स्टाफ की टीम ने साढ़े पांच घंटे में जटिल सर्जरी कर पटना के एक युवक की जिंदगी बचा ली। दरअसल पटना में ट्रैक्टर ट्रॉली के नीचे आने से गंभीर रूप से घायल युवक नीति कुमार की खाने और श्वसन नली आपस में मिल गई थी। इससे उसकी जिंदगी को गंभीर खतरा पैदा हो गया था।
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इसको देखते हुए पटना के डॉक्टरों ने उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर रेफर किया, जहां डॉक्टरों ने उसे नई जिंदगी दी। नीति कुमार अब स्वस्थ है और मंगलवार को उसे छुट्टी भी मिल गई।

एम्स के निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा ने बताया कि इस तरह की सर्जरी देश में पहली बार हुई है और यह एक दुर्लभ सर्जरी थी, जिसमें 100 से अधिक चिकित्सक, नर्स और पैरामेडिकल की टीम लगी थी। इस तरह का ऑपरेशन टीम के बिना संभव नहीं है। इसमें सर्जरी, ट्रॉमा सर्जरी, ईएनटी, कार्डियक सर्जरी, ट्रॉमा एनेस्थीसिया और कार्डियक एनेस्थीसिया के चिकित्सक शामिल हुए।
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मरीज को 220 मिनट तक दी गई आक्सीजन

सर्जरी में शामिल डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि मरीज को 220 मिनट तक कार्डियो पल्मोनरी बाईपास (सीपीबी) पर रखकर कृत्रिम तरीके से ऑक्सीजन दी गई। सांस लेने वाली नली इस तरह से खराब हुई थी कि उसे ट्यूब और वेंटिलेटर पर भी रखना मुश्किल था।

वहीं एक अन्य डॉ. सुबोध गुप्ता ने बताया कि पटना के चिकित्सकों ने बीमारी का सही तरीके से पता लगाया और समय पर मरीज को रेफर कर दिया। जब सीटी स्कैन में देखा गया कि मरीज की भोजन और श्वसन नली दोनों बुरी तरह से खराब हैं और सर्जरी करना बहुत मुश्किल है, तब कई विभागों के चिकित्सकों के साथ मिलकर विकल्पों पर चर्चा की गई।

सभी विकल्पों पर चर्चा के बाद सीपीबी विधि से ऑपरेशन करने का निर्णय लिया गया, ताकि हृदय और फेफडे़ कार्य करते रहें। उन्होंने बताया कि कृत्रिम तरीके से सांस की नली बना दी गई है और करीब तीन माह बाद खाने की नली भी बनाई जाएगी।
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ट्रैक्टर ट्रॉली के नीचे आ गए थे नीति कुमार

पटना निवासी नीति कुमार (18) अपने गांव दनियावां में ट्रैक्टर ट्रॉली के नीचे आकर 5 नवंबर 2014 को गंभीर रूप से घायल हो गया था। इस हादसे में उसकी छाती पर गंभीर चोट आई थी। गंभीर हालत में उसे पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

चार दिनों बाद उसे मुंह से खाना दिया जाने लगा, लेकिन उसे बार-बार बलगम आ जाता था और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। इंडोस्कोपी करने पर पता चला कि भोजन और श्वसन नली बुरी तरह से खराब हो चुकी हैं।

हादसे के दो सप्ताह बाद 19 नवंबर को युवक को दिल्ली के एम्स ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए लाया गया। लंबी प्रक्रिया और चर्चा के बाद 24 नवंबर को ट्रॉमा सेंटर में युवक का ऑपरेशन हुआ।
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