समुद्र तट से दूर व्हीलर द्वीप पर 3000 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया गया।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के प्रवक्ता रवि कुमार गुप्ता के मुताबिक, ‘सेना के स्ट्रैटेजिक फोर्स कमांड (एसएफसी) द्वारा संचालित किया गया परीक्षण बेहद सफल रहा। आंकडे़ दर्शाते हैं कि परीक्षण के सभी मानकों पर मिसाइल खरा उतरा।’
रक्षा सूत्रों ने बताया कि तकरीबन 4:55 बजे एकीकृत परीक्षण स्थल से स्वदेश विकसित मिसाइल को मोबाइल लांचर से छोड़ा गया। डीआरडीओ के अधिकारी के अनुसार अग्नि-3 सीरीज में यह दूसरा यूजर ट्रायल था।
इससे पहले पहला यूजर ट्रायल 21 सितंबर, 2012 को किया गया था, जो सफल रहा था। दो चरणों वाले ठोस ईंधन से लैस यह मिसाइल अपने साथ डेढ़ टन आयुध ले जा सकने में सक्षम है। यह मिसाइल सेना में पहले ही शामिल किया जा चुका है। जो उन्नत नेवीगेशन, निर्देशन और नियंत्रण प्रणालियों से लैस है।