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फिर गरमाया अफजल गुरु की फांसी का मुद्दा

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कश्मीर की तीन सीटों पर वोट की फसल काटने के लिए भावनाओं को सहलाने की सियासत तेज है। महंगाई, बेरोजगारी और जनसमस्याएं चुनावी मुद्दों में जगह नहीं बना पा रही है।
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नेशनल कांफ्रेंस और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की मुहिम में हर मुद्दे में मोदी समर्थन और विरोध का तड़का जरूर लगा होता है। कश्मीर की स्वायत्तता, समस्या के स्थायी समाधान और पाकिस्तान के साथ रिश्ते अहम मुद्दों में शुमार हैं।

संसद पर हमले के आरोपी अफजल गुरू को फांसी का मुद्दा भी चुनावी जंग में नए सिरे से उठाया जा रहा है।

शुरु हुआ एक-दूसरे पर आरोप का दौर

पहले पीडीपी सुप्रीमो मुफ्ती मोहम्मद ने यह कहकर नेशनल कांफ्रेंस को घेरा कि अगर वह मुख्यमंत्री होते तो अफजल गुरू को फांसी नहीं होने देते और उसकी मिलीभगत से ही अफजल को फांसी हुई।

जबकि नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख और केंद्रीय मंत्री फारूक अब्दुल्ला ने इस मुद्दे में भाजपा को घसीटते हुए कहा कि फांसी के लिए तत्कालीन गृह सचिव आरके सिंह ने व्यूह रचना की और कश्मीर के केंद्रीय मंत्रियों को भनक तक नहीं लगने दी।

याद रहे कि अब सिंह भाजपा में शामिल हो चुके हैं और बिहार के आरा से चुनाव लड़ रहे हैं।
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तल्ख हो रही जुबानी जंग

उधर, पीपुल्स कांफ्रेंस के चेयरमैन सज्जाद गनी लोन ने मुफ्ती को यह कहते हुए घेरा कि उनके मुख्यमंत्री रहते हुए जेकेएलएफ के संस्थापक मकबूल भट को फांसी दी गई थी।

श्रीनगर, अनंतनाग और बारमूला सीटों पर मुख्य भिड़ंत नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी में ही हो रही है। लिहाजा दोनों परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों के बीच जुबानी जंग तल्ख हो रही है।

अनंतनाग में 24 अप्रैल, श्रीनगर में 30 अप्रैल और बारमूला में 7 मई को मतदान होना है।
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