आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और जदयू के बीच बढ़ती नजदीकियों के फिर पुख्ता संकेत मिले हैं।
बीते रविवार को पटना में हुंकार रैली के दौरान हुए सिलसिलेवार विस्फोट मामले में कांग्रेस के साथ-साथ यूपीए सरकार का रुख नीतीश सरकार के प्रति नरम है।
बोध गया में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद सुरक्षा की बड़ी चूक से पटना में हुई घटना पर भी न तो कांग्रेस ने राज्य सरकार की आलोचना की है और न ही गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से राज्य सरकार की खिंचाई की।
भाजपा से 17 साल पुराना गठबंधन तोड़ने के बाद जदयू और कांग्रेस के संबंध लगातार बेहतर होते दिख रहे हैं। जदयू भी बीते दिनों संसद के मानसून सत्र में कई मौके पर सरकार का साथ देकर संबंध को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ी।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरनगर दंगा मामले में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के विवादास्पद बयान का बचाव कर बढ़ती नजदीकियों की चर्चा को और बल दिया था।
पटना में हुए धमाकों को गृह मंत्रालय बहुत बड़ी सुरक्षा चूक मान रहा है। खुफिया एजेंसियों का दावा है कि इस तरह की घटना के लिए पहले ही राज्य सरकार को सचेत कर दिया गया था।
खास बात यह है कि यह घटना तब घटी जब राष्ट्रपति बमुश्किल कुछ घंटे पहले ही पटना से दिल्ली रवाना हुए थे। मगर इस सबके बावजूद न तो गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे और न ही कांग्रेस ने नीतीश सरकार की तीखी आलोचना की।
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने नीतीश की सोची समझी साजिश के दावे का समर्थन भी किया। इससे पहले बोध गया में हुए धमाके और मिडडे मील खाने से दर्जनों बच्चों की मौत के मामले में भी कांग्रेस ने नरम रुख अपनाया था। ये दोनों घटनाएं भी जदयू-भाजपा की दोस्ती टूटने के बाद हुई थी।
भाजपा से अलग होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित जदयू का एक बड़ा धड़ा मुस्लिम मतों का अपने पक्ष में ध्रुवीकरण के लिए कांग्रेस से स्थायी संबंध बनाने का पक्षधर है। कांग्रेस में भी राहुल गांधी को नीतीश के साथ आगे बढ़ने का पैरोकार बताया जाता रहा है।