चार महीने पहले लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत हासिल करने के बाद उपचुनावों में औंधे मुंह गिरी भाजपा में ऊपर से तो नितांत चुप्पी दिख रही है, लेकिन पार्टी के भीतर खलबली मची हुई है।
दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की गैर मौजूदगी में भाजपा का कोई बड़ा नेता इस मुद्दे पर खुल कर या औपचारिक तौर पर बात करने से परहेज कर रहा है।
चर्चा होने लगी है कि भाजपा को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की रणनीति छोड़ मोदी के विकास और भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडों पर वापस लौटना होगा।
संभावना यह भी जताई जा रही है कि महाराष्ट्र और हरियाणा में क्षेत्रीय दलों से गठबंधन और समझौते के गड़बड़ हो रहे समीकरण के मद्देनजर पार्टी पीएम नरेंद्र मोदी को चुनाव प्रचार में उतारेगी।