प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दीवाली की तरह इस बार ईद भी कश्मीर में मनाना चाहते थे। वह चाहते थे कि ईद केएक दिन पहले वहां रोज़ा इफ्तार करके कश्मीर और देश के मुसलमानों को यह संदेश दें कि मोदी सरकार के लिए सबका साथ सबका विकास सिर्फ नारा ही नहीं है बल्कि सरकार इस पर अमल भी कर रही है।
लेकिन खुफिया एजेंसियों की हरी झंडी न मिलने से प्रधानमंत्री का ईद के मौके पर कश्मीरी अवाम के दिल पर मरहम लगाने का इरादा पूरा नहीं हो पा रहा है।
गौरतलब है कि पिछले दिनों मीडिया में पहले श्रीनगर में प्रधानमंत्री के ईद मनाने और रोज़ा इफ्तार करने की खबर प्रमुखता से आई थी। लेकिन उसके दो तीन दिन बाद प्रधानमंत्री कार्यालय के हवाले से उसका खंडन कर दिया गया।
आतंकवादी संगठन कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं
केंद्र सरकार के उच्चस्तरीय सूत्रों के मुताबिक मीडिया में आई खबर आधारहीन नहीं थी। दरअसल प्रधानमंत्री मोदी अपनी विदेश यात्रा पर जाने से पहले यह इरादा जता चुके थे। उनके संकेत के बाद इसको अमली जामा पहनाने के लिए आईबी के दो वरिष्ठ अधिकारी और भारत सरकार के अफगानिस्तान, पाकिस्तान और मुस्लिम देशों के मामले से जुड़े विशेष अधिकारी श्रीनगर गए।
उन्होंने वहां राज्य सरकार, सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों के स्थानीय अधिकारियों से बातचीत की । सबने एक ही बात कही कि प्रधानमंत्री की इस पहल का संकेत तो देश और दुनिया में बेहत सकारात्मक जाएगा। लेकिन अलगाववादी ताकतें, आतंकवादी संगठन और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इसे असफल बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगी।
प्रधानमंत्री के रोजा इफ्तार से पहले आतंकवादी संगठन कोई बड़ी वारदात कर सकते हैं तो इफ्तार के मौके पर अलगाववादी हुर्रियत कान्फ्रेंस और अन्य तंजीमें उग्र विरोध प्रदर्शन करते हुए काले झंडे और पाकिस्तान झंडे लहरा सकते हैं।
संदेश बेहद खराब जाएगा
सुरक्षा बलों पर पत्थर बाजी हो सकती है। ऐसे में राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय मीडिया जो इफ्तार कार्यक्रम कवर करने केलिए श्रीनगर में मौजूद होगा वह इन विरोध प्रदर्शनों को भी दिखाएगा और प्रधानमंत्री मोदी की सकारात्मक पहल न सिर्फ बेअसर हो जाएगी बल्कि पाकिस्तान और अलगाववादी इसका नकारात्मक प्रचार भी करेंगे।
खुफिया एजेंसियों ने चेताया कि अगर विरोध प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया और सुरक्षा बलों को कठोर कार्रवाई करनी पड़ गई तो उसका संदेश बेहद खराब जाएगा।
इसलिए मौजूदा माहौल में जब अलगाववादी लगातार घाटी में काले झंडे और पाकिस्तानी झंडे लहरा रहे हैं, प्रधानमंत्री का श्रीनगर आकर रोज़ा इफ्तार करना और ईद मनाना मुनासिब नहीं है। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने मीडिया की खबर का खंडन जारी कर दिया।