जिस तरह से भाजपा ने हरियाणा में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) को गठबंधन तोड़ने पर मजबूर किया, क्या कुछ वैसा ही वह महाराष्ट्र में कर सकती है।
अंदरखाने से आ रही खबरों से तो ऐसा नहीं लगता, पर शिवसेना को यह डर है कि भाजपा ने जो बर्ताव हजकां के साथ किया है, वही शिवसेना के साथ भी कर सकती है।
इस आशंका को भांपते हुए शिवसेना के कुछ नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को सलाह दी है कि वह भाजपा के साथ गठबंधन को लेकर सतर्क रहें।
शिवसेना महाराष्ट्र में भाजपा की सबसे पुरानी सहयोगी है। अब तक भाजपा हमेशा शिवसेना के साथ छोटे भाई की भूमिका में रही है लेकिन केंद्र में स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भाजपा के तेवर बदल गए हैं।
सूत्रों के अनुसार भाजपा महाराष्ट्र में चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद और उससे पहले 288 विधानसभा सीटों में से आधी हिस्सेदारी चाहती है, जबकि शिवसेना पुराने फॉर्मूले पर ही आगे बढ़ना चाहती है।