संविधान का (39वां संशोधन) अधिनियम, 1975
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव को न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर करने के लिए 1975 में 39 संविधान संशोधन किया गया।
इसके अधिनियम को पूर्वप्रभावी बनाया गया यानी इस संशोधन से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के खिलाफ लंबित मामलों को भी समाप्त करने की व्यवस्था की गई।
इस संशोधन के जरिए सरकार द्वारा लागू मीसा समेत 47 विवादित कानूनों पर मंजूरी मिल गई। इसका मकसद तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ चल रहे चुनाव से संबंधित विवादित मामलों को खत्म करना था।
1976
अभिव्यक्ति एवं बोलने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाने के लिए भारतीय संसद में 1976 में द प्रिवेंशन ऑफ पब्लिकेशन ऑफ ऑब्जेक्सनेबल मैटर एक्ट पारित किया गया। इसके तहत हिंसा या तोड़फोड़ या गंभीर अपराधों को उकसाने जैसे आपत्तिजनक मामले प्रकाशित करने पर मीडिया को दंडित करने का प्रावधान किया गया।
हालांकि इस अधिनियम को आपातकाल के बाद समाप्त कर दिया गया। आपातकाल के चलते संसद ने ‘द हाउस ऑफ पीपुल्स (एक्सटेंसन ऑफ ड्यूरेशन) एक्ट, 1976’ के तहत लोक सभा का कार्यकाल दो वर्ष के लिए बढ़ा दिया।