जदयू से 17 साल पुराना नाता टूटने पर भाजपा एकजुट होकर हमला नहीं बोल पा रही है।
वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को फोन कर इसका ठीकरा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजपोशी में दिखाई गई हड़बड़ी पर फोड़ा है।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक जदयू के एनडीए से अलग होने की घोषणा के बाद आडवाणी ने राजनाथ को फोन किया।
बताते हैं कि आडवाणी ने इस दौरान अपनी नाराजगी जताई और कहा कि अगर गोवा में मोदी की ताजपोशी में जल्दबाजी नहीं दिखाई गई होती तो यह गठबंधन नहीं टूटता।
17 साल बाद एनडीए से जदयू हुआ अलग
उल्लेखनीय है कि भाजपा की चुनावी कमान नरेंद्र मोदी के हाथ सौंपने से नाराज जदयू ने एनडीए से अलग होने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही भाजपा और जदयू की 17 साल पुरानी दोस्ती टूट गई।
वरिष्ठ पार्टी नेता सुषमा स्वराज ने इसे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। इसके अलावा सुषमा ने ट्वीट कर गठबंधन टूटने पर निराशा जाहिर की।
गठबंधन टूटने के बाद आडवाणी ने नाराजगी जता कर और सुषमा ने ठंडी प्रतिक्रिया देकर फिर से साफ कर दिया कि वे अब भी नए घटनाक्रम से नाराज हैं।
उल्लेखनीय हैं कि पार्टी के यही दो नेता मोदी की ताजपोशी में दिखाई गई हड़बड़ी से बेहद नाराज हैं।
'मोदी को तरक्की देकर कोई अपराध नहीं किया'
हालांकि मुख्तार अब्बास नकवी, शाहनवाज हुसैन सहित बिहार पार्टी के नेताओं ने जदयू पर तीखा हमला बोलने से गुरेज नहीं किया।
हालांकि पार्टी के अन्य नेताओं ने जदयू पर तीखा हमला बोलने से गुरेज नहीं किया।
पार्टी उपाध्यक्ष नकवी ने जदयू के संबंध तोड़ने पर कहा कि मोदी पर ऐसे हजार गठबंधन कुर्बान हैं। एक जदयू जाएगा तो दर्जनों दल एनडीए के साथ आएंगे। उन्होंने कहा कि जदयू ने आज जो किया है वह दुश्मन भी नहीं कर सकता।
उधर शाहनवाज हुसैन ने कहा, 'जब 2002 में गुजरात में दंगे हो रहे थे तब नीतीश और उनकी पार्टी के लोगों को एनडीए के साथ रहने और मंत्री बने रहने में आपत्ति नहीं थी। अब जबकि गुजरात में चौतरफा शांति का माहौल है तब जदयू ने एनडीए का साथ छोड़ कर अपनी मौकापरस्ती का परिचय दिया है।'
रविवार को राजनाथ ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ अपने आवास पर इस घटनाक्रम पर विचार विमर्श किया। इस दौरान रविशंकर प्रसाद, शाहनवाज और बिहार के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान मौजूद थे।
‘एनडीए का बिखरना दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है।’ --सुषमा स्वराज, ट्विटर पर
‘मोदी को लेकर कोई समझौता नहीं होगा। फिर चाहे गठबंधन एक बार टूटे या दस बार। पार्टी के भीतरी फैसले लेने पर हमारा अधिकार है। हम चाहते हैं कि गठबंधन चलता रहे, इसलिए मैं दो दिन पहले शरद यादव से मिला था। आडवाणी और राजनाथ ने भी उनसे बात की थी।’ --मुख्तार अब्बास नकवी, भाजपा उपाध्यक्ष